सर्दी का ये मौसम.....
सर्दी का ये मौसम बड़ा ही ठंढा- ठंढा।
फिर भी टीचर मारे बड़े जोर से डंडा॥
डंडा पड़ते ही अंगुली अकड़ जाती।
जब हाथों में गर्मी पड़ जाती॥
तब दर्द वह हमको लगती ।
अंगुलिया दर्द से हमें तड़पाती॥
मौसम तो है ये सबसे अच्छा।
पर ठंढ़ाती है हर एक कक्षा॥
अगर सर्दी का मौसम न आता।
तो स्वेटर, जैकेट पहनने को पछताता।।
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रविवार, 26 दिसंबर 2010
मंगलवार, 23 नवंबर 2010
शनिवार, 17 अप्रैल 2010
कविता: राजा ने किया रानी से मजाक
राजा ने किया रानी से मजाक
एक दिन राजा बोले रानी से ,
आलू लाओ जाकर खेतो से।
रानी बोली मै नहीं जाउंगी खेतो में,
चाहे मुझको रखो न तुम अपने घर में।
सुनकर रानी की ऐसी बानी,
राजा पीने लगे जल्दी से पानी ।
राजा बोले मैंने तो मजाक किया,
तुमने उसको सच मान लिया।
तुम तो हो इस घर की रानी,
समझा करो तुम मेरी बानी।
रानी बोली ऐसा मजाक न मुझसे करना,
चली जाउंगी मायके तब पछताते रहना।
राजा बोले माफ़ करो चुप हो जाओ रानी,
भूख लगी है लाओ जल्दी दे दो खाना पानी।
किसकी कविता किसकी कहानी,
राजा रानी की ख़त्म हुई कहानी।
एक दिन राजा बोले रानी से ,
आलू लाओ जाकर खेतो से।
रानी बोली मै नहीं जाउंगी खेतो में,
चाहे मुझको रखो न तुम अपने घर में।
सुनकर रानी की ऐसी बानी,
राजा पीने लगे जल्दी से पानी ।
राजा बोले मैंने तो मजाक किया,
तुमने उसको सच मान लिया।
तुम तो हो इस घर की रानी,
समझा करो तुम मेरी बानी।
रानी बोली ऐसा मजाक न मुझसे करना,
चली जाउंगी मायके तब पछताते रहना।
राजा बोले माफ़ करो चुप हो जाओ रानी,
भूख लगी है लाओ जल्दी दे दो खाना पानी।
किसकी कविता किसकी कहानी,
राजा रानी की ख़त्म हुई कहानी।
लेखक: आशीष कुमार, अपना घर, कक्षा ७
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