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गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

कविता: ग्लोबल वार्मिंग........

ग्लोबल वार्मिंग........

बस, कार, ट्रक सभी चलाते है।
उससे वातावरण गन्दा करते है॥
यदि वातावरण साफ़ है रखना।
तो धुआँ रहित साधन प्रयोग करना॥
क्योकि हो रहा है ग्लोबलवार्मिंग।
यह है सभी के लिए वार्निंग॥
सभी को है यदि बचाना।
हर इंसा पेड़ खूब लगाना॥
पर्यावरण पर पड़ता रहा जो खतरा।
नहीं बचेगा इंसा का एक भी कतरा॥

लेख़क: आशीष कुमार, कक्षा ८, अपना घर

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

सबके जीवन में प्रकाश हो

लक्ष्मी का हाथ हो ,

सरस्वती का साथ हो |

गणेश जी का निवास हो ,

माँ दुर्गा का आशीर्वाद हो |

माता - पिता के आशीर्वाद से ,

आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो |





नाम : लक्ष्मी देवी

कक्षा : 2th

सेन्टर : अपना स्कूल ,

पनकी सेन्टर

शुक्रवार, 11 जून 2010

कविता ; प्रदूषण

प्रदूषण
प्रदूषण ने किया है परेशान ,
खोले हैं ये फैक्ट्ररियों की खान....
गर्मी से हैं अब सब बेहाल ,
मत पूछो अब किसी का हाल......
जब मार्च के महीने में है यह हाल ,
तो मई-जून आदमी हो जायेगा लाल..
आगे और पता नहीं क्या होगा ?
आदमी का कुछ पता नहीं होगा....
गाड़ी मोटर कार जो चलाते,
जाने कितना प्रदूषण कर जाते....
क्यों न करें हम साइकिल का इस्तेमाल ?
तब शायद सुधरे थोडा हाल ....
पड़ रही है गर्मी बहुत इस बार,
पहुँच गया है परा ४८ के पार....

लेखक :धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा :८
अपना घर

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

कविता: राजा ने किया रानी से मजाक

राजा ने किया रानी से मजाक

एक
दिन राजा बोले रानी से ,
आलू लाओ जाकर खेतो से।
रानी बोली मै नहीं जाउंगी खेतो में,
चाहे मुझको रखो न तुम अपने घर में।
सुनकर रानी की ऐसी बानी,
राजा पीने लगे जल्दी से पानी ।
राजा बोले मैंने तो मजाक किया,
तुमने उसको सच मान लिया।
तुम तो हो इस घर की रानी,
समझा करो तुम मेरी बानी।
रानी बोली ऐसा मजाक न मुझसे करना,
चली जाउंगी मायके तब पछताते रहना।
राजा बोले माफ़ करो चुप हो जाओ रानी,
भूख लगी है लाओ जल्दी दे दो खाना पानी।
किसकी कविता किसकी कहानी,
राजा रानी की ख़त्म हुई कहानी।

लेखक: आशीष कुमार, अपना घर, कक्षा ७

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

कविता: अब नहीं किसी का जुल्म सहेंगे

अब नहीं किसी का जुल्म सहेंगे

जुल्म क्या है ? जुल्म से लड़ना सीखो,
मुल्क क्या है ? मुल्क में रहना सीखो।
कोई किसी को मारे ये जुल्म है,
कोई खड़ा देखे ये तो और जुल्म है।
अपना मुल्क तो अपना भारत देश है।
टोपी, चश्मा, हाथ में लाठी ये गाँधी जी का वेश है।
लक्ष्मी बाई और भगत सिंह ने भारत में जन्म लिया,
इस देश कि खातिर अपने प्राणों को गंवा दिया।
गोरे हम पर जुल्म ढाने आये,
साथ में गोला, बारूद, बम लाये।
सारा देश फिर एक हुआ,
जुल्म के खिलाफ साथ हुआ।
जनता बोली नहीं सहेंगे जुल्म किसी का,
गोरा काला सरकार या और किसी का।
आओ मिलकर फिर से लड़ेंगे,
गलत हुआ तो चुप न रहेंगे।
अब न किसी का जुल्म सहेंगे,
आजाद है हम आजाद रहेंगे।
लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना घर



सोमवार, 31 अगस्त 2009

kavita: रविवार का दिन

रविवार का दिन

रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा....
इस दिन रहती सभी की छुट्टी ,
बच्चा बच्चा सारा दिन करता मस्ती...
फिल्म देखना फुटबाल खेलना,
नाटक सीखना और दिखाना ...
इधर उधर खूब घूमने जाना ,
यही है दिन भर का दिनचर्या ...
रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा...

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर