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शनिवार, 6 अगस्त 2011

कविता - जल

जल 
पानी जीवन हैं सबका 
 आदमी हो या बच्चा  
 जल तो होता हैं तरल 
 बहे तभी जब ढाल 
 H और O का मिश्रण  
 साथ में होता हैं लवण  
 रसायन  में जाना हमने 
  दो H और O इसमे 
 फ्री  में जल मिलेगा भइया 

मंगलवार, 28 जून 2011

कविता : ज्यादा पानी न डालो रानी

ज्यादा पानी न डालो रानी
क्यारियों के किनारों में ,
छाई हैं हरियाली .....
जिसको  देख रही हैं रानी  ,
लगी हैं उसके ओठो में लाली ....
क्यारियों में लगा रही हैं पानी ,
 उगा रही हैं पौधों के बीज .....
 छोटी -छोटी क्यारियों  में ,
 जिसमे हो रही हैं पानी के बर्बादी .....
 पानी उतना बर्बाद करो रानी ,
जिससे लोगो को न हो हैयरानी.... 
क्यारियों के किनारों में ,
 छाई हैं हरियाली .....
 लेखक - हंसराज 
 कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर

शनिवार, 25 जून 2011

कविता -नेता

नेता 
अपने देश के नेता हैं कैसे ,
लूटते रहते देश के पैसे ....
कालाधन को विदेशों में जमा कर रहे हैं,
भ्रष्ट नेता अपने बुढ़ापे के लिए ......
लेकिन जनता भूखी मर रही हैं  ,
इन भ्रष्ट नेताओं के कारण......
आखिर ये भ्रष्ट नेता इस कालेधन को क्या करेगे,
मुझे लगता हैं ,ये इन पैसों से अपनी चिता जलायेगे......
राजा हो या कलमाड़ी ,
सब के सब करते हैं घोटाला .....
कोई नहीं हैं इन्हें बोलने वाला .....
लेखक -मुकेश कुमार 
कक्षा -१० अपना घर ,कानपुर

मंगलवार, 17 मई 2011

कविता : वही है भगवान

 वही है भगवान
जिन्हें अपनों की परवाह नहीं ,
दूसरों से चाहत नहीं ...
इन्साफ की परवाह नहीं ,
वह अपना हिन्दुस्तान नहीं ...
जिसे अपने पेट की परवाह हीं नही ,
अपनी बीबी से लगाव नहीं ....
और अपने बच्चों से प्यार नहीं , 
वह एक सच्चा इंसान नहीं ....
जिसे सभी से प्यार हो ,
हर एक से लगाव हो ....
और सभी को सम्मान दे ,
 वह है एक सच्चा इंसान ....
वही है इस युग का भगवान ,

लेखक : अशोक कुमार , कक्षा : 9, अपना घर  

रविवार, 6 मार्च 2011

कविता - हुआ सबेरा

हुआ सबेरा 

सुबह सुबह जब चिड़ियाँ बोली.
माँ ये बोली बेटा मुन्ना उठ जा  तू ..
देर बहुत जब हो जायेगी .
तो स्कूल कब जाओगे..
मम्मी एक दिल की बात हैं.
पापा कि वह बाइक कहाँ ..
उससे मैं चला जाउँगा.
फिर तो देर कभी  न होगी..  
रजाई में घुस जाऊंगा . 
एक और नीद सो जाऊँगा..  
जब पता चली थी यह बात ..
सपना देखा था वह रात .
रजाई से उठे फिर झट से.. 
 पहुँच गए स्कूल पट से
लेखक - तुलसी , कक्षा - ७ , अपना स्कूल , कानपुर

बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

शीर्षक -महंगाई

कविता - महंगाई
सुनो सुनो भाई सब देश वासियों ,
धनिया प्याज मिर्चा हो गया महंगा ....
लगता हैं पेट्रोल  पानी में बहेगा ,
अगर इतनी महंगाई हो जायेगी ....
गरीब जनता भूखी मर जायेगी ,
जो सौ रुपये कमाता है....
वह केवल सब्जी ही ला पाता है ,
पढाई-लिखाई का अन्य पैसा .....
गरीब ब्यक्ति नहीं जुटा पाता हैं ,
आखिर इतनी महंगाई क्यों बढ़ गई .....
हमको नहीं बताया हैं ,
सरकार ने अपने मन से ....
महंगाई को बढ़ाया है ,
एक दिन येसा आयेगा ....
पानी भी मंहगा हो जाएगा ,
जो लोग गरीब हैं ....
उनकों कौन बचाएगा ,
सुनों-सुनों भाई सब देश वासियों .....
धनियाँ,प्याज,मिर्चा हो गया मंहगा ,






लेख़क :मुकेश कुमार 
कक्षा :९
अपना घर

रविवार, 26 दिसंबर 2010

कविता: सर्दी का ये मौसम...

सर्दी का ये मौसम.....

सर्दी का ये मौसम बड़ा ही ठंढा- ठंढा।
फिर भी टीचर मारे बड़े जोर से डंडा॥
डंडा पड़ते ही अंगुली अकड़ जाती।
जब हाथों में गर्मी पड़ जाती॥
तब दर्द वह हमको लगती ।
अंगुलिया दर्द से हमें तड़पाती॥
मौसम तो है ये सबसे अच्छा।
पर ठंढ़ाती है हर एक कक्षा॥
अगर सर्दी का मौसम न आता।
तो स्वेटर, जैकेट पहनने को पछताता।।


लेख़क: आशीष कुमार सिंह, कक्षा ८, अपना घर

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

सबके जीवन में प्रकाश हो

लक्ष्मी का हाथ हो ,

सरस्वती का साथ हो |

गणेश जी का निवास हो ,

माँ दुर्गा का आशीर्वाद हो |

माता - पिता के आशीर्वाद से ,

आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो |





नाम : लक्ष्मी देवी

कक्षा : 2th

सेन्टर : अपना स्कूल ,

पनकी सेन्टर

शुक्रवार, 11 जून 2010

कविता ; प्रदूषण

प्रदूषण
प्रदूषण ने किया है परेशान ,
खोले हैं ये फैक्ट्ररियों की खान....
गर्मी से हैं अब सब बेहाल ,
मत पूछो अब किसी का हाल......
जब मार्च के महीने में है यह हाल ,
तो मई-जून आदमी हो जायेगा लाल..
आगे और पता नहीं क्या होगा ?
आदमी का कुछ पता नहीं होगा....
गाड़ी मोटर कार जो चलाते,
जाने कितना प्रदूषण कर जाते....
क्यों न करें हम साइकिल का इस्तेमाल ?
तब शायद सुधरे थोडा हाल ....
पड़ रही है गर्मी बहुत इस बार,
पहुँच गया है परा ४८ के पार....

लेखक :धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा :
अपना घर

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

कविता: कैसे अपना संसार बना

कैसे अपना संसार बना

कई मोहल्लो से मिलकर बनता गाँव,
वंहा पर मिलती सबको पेड़ो की छाँव।
गाँव मिलाकर बनती ग्राम पंचायत,
गर्मी में जब पानी पीते तब मिलती राहत।
ग्राम पंचायत मिलकर ब्लाक है बनता,
अब कोई किसी की नहीं है सुनता।
ब्लाक मिलाकर बनती तहसील ,
दुनिया में तो सबसे होती भूल।
तहसील मिलाकर जिला है बनता,
हर इंसा हर एक पर हँसता।
जिला मिलाकर राज्य है बनता,
हर राज्य में मुख्य मंत्री है रहता।
राज्य मिलाकर बनता देश,
सबका अपना रंग बिरंगे वेश
देश मिलाकर बनते महाद्वीप,
दिवाली में आओ जलाये तेल के दीप।
महाद्वीप मिलाकर ग्रह है बनता,
पृथ्वी ग्रह पर ही जीवन मिलता।
जिसमे हम सब है प्यार से रहते,
संसार को हम सब मिलकर रचते ।

लेखक: आशीष कुमार, कक्षा ७, अपना घर, कानपुर

सोमवार, 31 अगस्त 2009

kavita: रविवार का दिन

रविवार का दिन

रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा....
इस दिन रहती सभी की छुट्टी ,
बच्चा बच्चा सारा दिन करता मस्ती...
फिल्म देखना फुटबाल खेलना,
नाटक सीखना और दिखाना ...
इधर उधर खूब घूमने जाना ,
यही है दिन भर का दिनचर्या ...
रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा...

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर