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मंगलवार, 28 जून 2011

कविता : ज्यादा पानी न डालो रानी

ज्यादा पानी न डालो रानी
क्यारियों के किनारों में ,
छाई हैं हरियाली .....
जिसको  देख रही हैं रानी  ,
लगी हैं उसके ओठो में लाली ....
क्यारियों में लगा रही हैं पानी ,
 उगा रही हैं पौधों के बीज .....
 छोटी -छोटी क्यारियों  में ,
 जिसमे हो रही हैं पानी के बर्बादी .....
 पानी उतना बर्बाद करो रानी ,
जिससे लोगो को न हो हैयरानी.... 
क्यारियों के किनारों में ,
 छाई हैं हरियाली .....
 लेखक - हंसराज 
 कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर

शनिवार, 25 जून 2011

कविता -नेता

नेता 
अपने देश के नेता हैं कैसे ,
लूटते रहते देश के पैसे ....
कालाधन को विदेशों में जमा कर रहे हैं,
भ्रष्ट नेता अपने बुढ़ापे के लिए ......
लेकिन जनता भूखी मर रही हैं  ,
इन भ्रष्ट नेताओं के कारण......
आखिर ये भ्रष्ट नेता इस कालेधन को क्या करेगे,
मुझे लगता हैं ,ये इन पैसों से अपनी चिता जलायेगे......
राजा हो या कलमाड़ी ,
सब के सब करते हैं घोटाला .....
कोई नहीं हैं इन्हें बोलने वाला .....
लेखक -मुकेश कुमार 
कक्षा -१० अपना घर ,कानपुर

शुक्रवार, 24 जून 2011

कविता -सपनों में खो गया

सपनों में खो गया 
एक दिन की हम बात बताते ,
अध्यापक जी हैं हमको पढ़ाते....
एक बार मुझे क्या हो गया ,
मैं अपने सपनों में खो गया .....
जैसा की अध्यापक ने पढाया ,
मैं उसको अपने ऊपर से उड़ाया.....
अध्यापक जी हमको पढ़ाते हैं,
 हम अपने सपनों में खो जाते हैं ......
लेखक - ज्ञान कुमार 
कक्षा -८ अपना घर ,कामपुर

शनिवार, 11 जून 2011

कविता -डिस्कबरी

डिस्कबरी
डिस्कबरी चैनल कितना अच्छा हैं ,
अच्छे -अच्छे चित्र दिखाता हैं....
पुराणों की याद दिलाता हैं ,
इतिहासिक चित्र दिखाता हैं.....
भरपूर हमारा मनोरंजन कराता, 
सारा संसार दिखाता रहता .....
संसार हमारा कितना प्यारा,
विभिन्न खोज दिखाता रहता ......
टी.वी. आदि के माध्यम से,
मनोरंजन हमारा कराता हैं......
डिस्कबरी चैनल कितना अच्छा है,
अच्छे -अच्छे चित्र दिखाता हैं .....
लेखक -मुकेश कुमार
कक्षा -१० अपना घर ,कानपुर

गुरुवार, 2 जून 2011

कविता -बढ़ता ही गया

बढ़ता ही गया 
रात को किसी के घर से निकला ,
वो था शायद अन्दर से पगला .....
शायद वो नयी राह चला था ,
किसी के पैसे के झंझट में पड़ा था......
रास्ते में उसको एक राही मिला ,
जैसे उसको लगा कोई पहाड़ खड़ा....
लेकिन वो पहाड़ से टकरा कर आगे बढ़ा,
और आगे जीवन में बढ़ता ही गया .....
रात को किसी के घर निकला ,
वो था शायद अन्दर से पगला .....
लेखक -ज्ञान कुमार 
कक्षा -८ अपना घर ,कानपुर

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

कविता -बिल्ली

बिल्ली 
बिल्ली आयी मेरे घर में ,
खड़ बड़ बहुत मचाती  हैं ....
दूध पी कर जाती हैं ,
हमको बहुत सताती हैं....
चूहे को मार गिरती हैं ,
बर्तन बहुत गिरती हैं ....
बिल्ली आयी बिल्ली आयी,
दिल्ली में भाई बिल्ली आयी....
लाल किले पर चढ़ती हैं ,
ऊपर से गिर - गिर जाती हैं.....
फिर बाजार को जाती हैं ,
फिर मिठाई वह खाती हैं ......
अपने घर को जाती हैं ,
अपना नाम नहीं बताती हैं.....
लेखक -अजय कुमार
कक्षा -५  अपना घर कानपुर

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

कविता - मंजिल अब दूर नहीं

 मंजिल अब दूर नहीं 
कदम से कदम बढ़ाओ डरो नहीं ,
जो सही था वही हैं सही ....
आज के गौरव हो तुम्ही ,
आगे बढ़ो" मंजिल अब दूर नहीं" .....
मंजिल तक पहुँचना हैं अगर ,
तो तय करनी पड़ेगी कठिन से कठिन डगर.....
रूकावटे डालेगे भ्रष्टाचार करने वाले ही ,
आगे बढ़ो "मंजिल अब दूर नहीं" .....
चाहे लाख करे कोई प्रयास ,
सिर पर पड़े भले ही ईंट या बाँस.....
ईंट का जवाब पत्थर  से देना नहीं ,
आगे बढ़ो "मंजिल अब दूर नहीं" ....
हाथ से हाथ मिलाते रहना ,
अपने कदमों को डगमगाने न देना.....
अब जो डरा समझा वह बचा नहीं ,
आगे बढ़ो "मंजिल अब दूर नहीं" ....
लेखक - आशीष कुमार 
कक्षा - ८ अपना घर , कानपुर

गुरुवार, 24 मार्च 2011

कविता - भारत में कोई नहीं बोलने वाला

 भारत में कोई  नहीं बोलने वाला  
देश में अपने होता घोटाला ,
नेता -मंत्री न कोई बोलने वाला ....
नेता मंत्री क्यों बोले ,
अपना मुँह वह क्यों खोले ....
नेता मंत्री खुद करते है घोटाला,
लगाके गोदामों में ताला ....
राजा हो या कलमाड़ी ,
सब के सब करते हैं घोटाला...
भारत में कोई नहीं बोलने वाला,
ये हैं देश के भ्रष्ट नेता ....
गरीबों की रोजी मारे,
पैसों से भरते अपने झोले....                                                                                                  देश में अपने होता  घोटाला, 
नेता -मंत्री न कोई  बोलने वाला ....
लेखक - मुकेश कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर , कानपुर