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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

जवानी

जवानी 
प्राण लिए खड़ी है पागल जवानी....
कौन कहता है दूध पीते है या पानी|
पहन ले नर गोलियों की माल....
चल उठ बन जा देश का रखवाल|
रक्त है या नसों में कायर पानी....
देख क्र पता चल जायेगा क्या है कहानी|
चढ़ा दे प्राण अपना स्वतंत्रता पर....
सबको पता चल जायेगा क्या है पागल जवानी|
प्राण लिए खड़ी है पागल जवानी....
कौन कहता है दूध पीते है या पानी|
नाम :सागर कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर , कानपुर
 

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

मैं सोचता हूँ

मैं सोचता हूँ 
क्या लिखूं  क्या याद करूँ ,
मन में कुछ उमंग सी उठती है....
ह्रदय में कुछ स्फूर्ति सी आती है ,
मस्तिष्क में आवेग सा उत्पन्न होता है ....
मुझे कविता लिखना ही पड़ता है ,
उस समय नहीं रहती किसी विषय की चिंता ....
कोई भी विषय क्यों न होता ,
उसमे अपने मन को आवेग से भर देते है ....
और जो कविता मन में उठती है,
हम उसको लिख देते हैं ....
लिखावट कितनी भी ख़राब हो ,
हमें लिखने की कोशिश करनी चाहिए ...
उठते हैं जो हमारे मन में विचार ,
उन्हें लिखना  ही चाहिए ....
नाम :मुकेश कुमार 
    कक्षा :10                
अपना घर ,कानपुर 

बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

शीर्षक -महंगाई

कविता - महंगाई
सुनो सुनो भाई सब देश वासियों ,
धनिया प्याज मिर्चा हो गया महंगा ....
लगता हैं पेट्रोल  पानी में बहेगा ,
अगर इतनी महंगाई हो जायेगी ....
गरीब जनता भूखी मर जायेगी ,
जो सौ रुपये कमाता है....
वह केवल सब्जी ही ला पाता है ,
पढाई-लिखाई का अन्य पैसा .....
गरीब ब्यक्ति नहीं जुटा पाता हैं ,
आखिर इतनी महंगाई क्यों बढ़ गई .....
हमको नहीं बताया हैं ,
सरकार ने अपने मन से ....
महंगाई को बढ़ाया है ,
एक दिन येसा आयेगा ....
पानी भी मंहगा हो जाएगा ,
जो लोग गरीब हैं ....
उनकों कौन बचाएगा ,
सुनों-सुनों भाई सब देश वासियों .....
धनियाँ,प्याज,मिर्चा हो गया मंहगा ,






लेख़क :मुकेश कुमार 
कक्षा :९
अपना घर