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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

शीर्षक -महंगाई

कविता - महंगाई
सुनो सुनो भाई सब देश वासियों ,
धनिया प्याज मिर्चा हो गया महंगा ....
लगता हैं पेट्रोल  पानी में बहेगा ,
अगर इतनी महंगाई हो जायेगी ....
गरीब जनता भूखी मर जायेगी ,
जो सौ रुपये कमाता है....
वह केवल सब्जी ही ला पाता है ,
पढाई-लिखाई का अन्य पैसा .....
गरीब ब्यक्ति नहीं जुटा पाता हैं ,
आखिर इतनी महंगाई क्यों बढ़ गई .....
हमको नहीं बताया हैं ,
सरकार ने अपने मन से ....
महंगाई को बढ़ाया है ,
एक दिन येसा आयेगा ....
पानी भी मंहगा हो जाएगा ,
जो लोग गरीब हैं ....
उनकों कौन बचाएगा ,
सुनों-सुनों भाई सब देश वासियों .....
धनियाँ,प्याज,मिर्चा हो गया मंहगा ,






लेख़क :मुकेश कुमार 
कक्षा :९
अपना घर

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

kavita: अब न गुस्सा करूँगा भाई.....

अब न गुस्सा करूँगा भाई.....

ऐसी खवाई जिसने की रोटी खाई.
उसकी खवाई मेरी समझ में नहीं आई.. 
रोटी खाकर उसने ली जब अंगडाई. 
उसकी खटिया बड़ी जोर से चरमराई.. 
जब देखा उसने खटिया से उठकर. 
चारो पाये अलग गिरे टूटकर ..
खटिया में लगी थी नकली लकड़ी.
गुस्से में उसने बीबी की चोटी पकड़ी..
पत्नी रोई, चिल्लाई खूब शोर मचाई.
इस झगड़े में बीबी को खो गई बाली..
बीबी बोली ढूंढ़कर दो मेरी बाली.
नहीं तो यह घर हो जायेगा खाली..
उसने बीबी को किसी तरह मनाया .
सोनार से सोने की बाली बनवाया ..
कान पकड़ कर उसने कसम खाई.
अब किसी से गुस्सा नहीं करूँगा भाई..


लेख़क: आशीष कुमार, कक्षा 8, अपना घर