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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

शीर्षक : बसन्त ऋतु

बसन्त ऋतु 
बसन्त ऋतु का मौसम,
बड़ा ही ठंडा और शीतल ....
नदियों का पानी ठंडा-ठंडा,
बहता रहता कल-कल ....
हवा चली है पुरवायी,
झूमें हर पेड़ की डालें ....
हरे-भरे फूलों के ऊपर ,
बैठें हैं भँवरे मतवाले.....
चिड़ियाँ चहकें पेड़ों पर ,
तितली उड़ती फूलों पर .....
हवा के एक झरोखे से ,
सब पत्ते गिरते पेड़ों से .....

लेख़क :आशीष कुमार 
कक्षा :८
अपना घर

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

कविता: ग्लोबल वार्मिंग........

ग्लोबल वार्मिंग........

बस, कार, ट्रक सभी चलाते है
उससे वातावरण गन्दा करते है॥
यदि वातावरण साफ़ है रखना।
तो धुआँ रहित साधन प्रयोग करना
क्योकि हो रहा है ग्लोबलवार्मिंग।
यह है सभी के लिए वार्निंग॥
सभी को है यदि बचाना
हर इंसा पेड़ खूब लगाना॥
पर्यावरण पर पड़ता रहा जो खतरा।
नहीं बचेगा इंसा का एक भी कतरा॥

लेख़क: आशीष कुमार, कक्षा , अपना घर

बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

कविता -औरत ने जन्म दिया बच्चे को

औरत ने जन्म दिया बच्चे को
प्रकृति ने रचा है पृथ्वी को ,
औरत ने जन्म दिया है बच्चे को ।
बच्चों को किसी तरह पाल-पोषकर बढ़ा सकें ,
ताकि बच्चे बड़ें होकर माँ को आराम दें सकें ।
पर आज के युग में बच्चे ऐसा करते नहीं ,
माँ बाप के कहने पर चलते नहीं ।
जो मन में आये वही करते हैं ,
जुआँरी ,शराबी तभी तो बनते हैं ।
लेखक :आशीष कुमार
कक्षा :
अपना घर