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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

कविता: जल का न करे दुरूपयोग

जल का करे दुरूपयोग

जल ही जीवन है हम सबका,
कभी करे दुरूपयोग इसका....
जल बिन जीवन होगा कैसा,
बंजर धरती बिन प्राणी जैसा....
आओ हम मिल सरंक्षण करे इसका,
जल ही जीवन है हम सबका....
आओ मिल पानी की बूंद बचाए हम,
जीवन के सबको सुखी बनाये हम....
जल के दुरूपयोग को मिल रोके हम,
दुनिया के जीवन आगे बढाये हम....
जल का है महत्त्व बड़ा,
इससे ही हर चीज खड़ा...
जल का हम सब करते उपयोग,
इसलिए कभी करे इसका दुरूपयोग.....

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा , अपना घर

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

कविता: रक्षाबंधन त्यौहार

रक्षाबंधन त्यौहार

आज बुधवार है,
नानकारी का बाजार है...
बाजार का झोला तैयार है,
आज मेरी सोच बेकार है...
आज तो रक्षा बंधन त्यौहार है,
राखी हाथ में बंधने को तैयार है..
राखी हम पहले बंधावायेंगे,
बाजार
फ़िर बाद में जायेंगे...
खूब जम के मिठाई खायेंगे,
मिलके खुशियाँ मनाएंगे...
लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना घर

बुधवार, 8 जुलाई 2009

कविता: यादें गाँव और बचपन की

यादें गाँव और बचपन की
याद हमें आती है हर पल अपने गाँव की बातों की
याद हमें आती है हर पल, बचपन की उन बातों की.
गाँव की गलियां, गाँव के रस्ते, खुशबु अपने माटी की.
याद हमें आती है हर पल अपने गाँव की बातों की.
गुल्ली डंडा, चोर सिपाही, कुकडू कू और भाग-भगाई.
चिक्का, कबड्डी, लाली बेटा, खेल थे अपने गांवों की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातो की.
आम के पेडों पर वो चढ़ना, खेल-खेल में लड़ना-झगड़ना.
रात हुई तो जंगल परियां, थे किस्से, कहानी बाबा की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातो की.
फूलों पर तितली को पकड़ना, रात को मिलके जुगुनू पकड़ना.
बारिस होते ही तैराते, कागज की उन नावों की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
भालू का हम नाच देखते, जादू की वो बात सोचते.
ध्यान लगा रहता था दिल में, आइसक्रीम की घंटी की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
भैस के ऊपर चढ़ना-उतरना, बकरी और पिल्ले को पकड़ना.
खेतों की उस पगडण्डी पर, झरबेरी के पेडों की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
लकड़ी की पाटी ले जाना, खट्टी मिठ्ठी इमली खाना.
यारो के संग एक दूजे को, चिढ़ने और चिढ़ाने की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
गाँव के कुत्तो को दौड़ाना, पेडों से बन्दर को भगाना.
चरता गधा मिल जाये तो, मजा थी उसकी सवारी की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
सबके संग में मेला जाना, चोरी-चुपके चाट खाना.
यारो के संग एक दूजे को, हंसने और हँसाने की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.
याद हमें आती है हर पल, बचपन की उन बातों की.
गाँव की गलियां, गाँव के रस्ते, खुशबु अपने माटी की.
याद हमें आती है हर पल, अपने गाँव की बातों की.

महेश, कानपूर