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रविवार, 18 मार्च 2012

कविता : मौसम

 मौसम 

धूल,मिटटी,ककंड के संग ,
 ईंट,भट्टों के बीच गुजर रहा था जीवन......
ईंट की भट्टियां और भयानक गर्मी में,
बीता जा रहा था ये अपना बचपन......
धूल मिट्टी और कंकड़ के संग,
घुल मिल सा गया था ये मन .....
पड़ने का था शौक बहुत मुझे,
इस जीवन से न थी कोई आशा ......
सुबह-२ बच्चों को स्कूल जाते देख,
होती मन में बड़ी जिज्ञासा......
एक रोज है वो बात,
मैं कर रहा था भट्टेपर काम ......
तभी आयी एक खबर मेरे पास ,
पड़ने का था एक वो पैगाम.........      

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर  
  
 

गुरुवार, 24 सितंबर 2009

कविता: जल का न करे दुरूपयोग

जल का करे दुरूपयोग

जल ही जीवन है हम सबका,
कभी करे दुरूपयोग इसका....
जल बिन जीवन होगा कैसा,
बंजर धरती बिन प्राणी जैसा....
आओ हम मिल सरंक्षण करे इसका,
जल ही जीवन है हम सबका....
आओ मिल पानी की बूंद बचाए हम,
जीवन के सबको सुखी बनाये हम....
जल के दुरूपयोग को मिल रोके हम,
दुनिया के जीवन आगे बढाये हम....
जल का है महत्त्व बड़ा,
इससे ही हर चीज खड़ा...
जल का हम सब करते उपयोग,
इसलिए कभी करे इसका दुरूपयोग.....

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा , अपना घर