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मंगलवार, 28 जुलाई 2009

कविता: बारिस का मौसम आया

बारिस का मौसम आया

बरसात का है ये मौसम आया,
हरियाली से धरती को है सुंदर बनाया...
बरसात हुई तो पक गई जामुन,
खाने में लोगों को बड़ा मजा आया...
बरसात में हरी भरी घास से,
क्यारियों को लोगों ने खूब सजाया...
रंग बिरंगे सुंदर फूलों ने मिलकर,
इस संसार को है ऐसा महकाया...
आज हुई है जमकर खूब बरसात ,
सब लोगों ने मिलकर खूब नहाया...
बरसात का है मौसम आया,
धरती को है सुंदर बनाया...

धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर

सोमवार, 27 जुलाई 2009

कविता: बरसते पानी में

बरसते पानी में
बरस रहा है पानी,
कैसे मै बाहर निकलू ....
इस पानी को कैसे बंद करें,
ये है ऊपर वाले की मेहरबानी.....
बरसते हुए पानी में,
बहते हुए पानी में....
नहाने का मन कर रहा है,
पर अन्दर से डर लग रहा है.....
पानी खूब बरस रहा है,
खेलने को मन तरस रहा है...

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर

रविवार, 5 जुलाई 2009

कविता: आसमान में छाये बादल

आसमान में छाये बादल
आसमान में छाये बादल ।
काले नीले सफ़ेद
काले बादल ने ये बोला
मै पानी बरसाऊंगा
झट नीले बादल ने बोला
मै पानी भर लाऊँगा
सफ़ेद बादल भी पट से बोला
मै रस्ता दिखलाऊँगा

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा , अपना घर