सोमवार, 31 मार्च 2025

कविता : " कभी काम आएगे "

" कभी काम आएगे "   
 वक्त पड़ने पर सब आते है ,
काम हो जाने के बाद चले जातें है। 
वो सिर्फ आप के साथ रहने का दिखवा करते है। 
और तुरंत ही भूल जाते है ,
छड़ भर  में वो बदल जाएगे। 
हमें आधे रास्ते पर ही छोड़ जाएगे। 
तो वो नजर कहा आएगे ,
हमारे साथ रहने का दिखावा करते है। 
जब काम पड़ता है ,
तब छड़ भर में ही भूल जाते है। 
 वक्त पड़ने पर सब आते है ,
काम हो जाने के बाद चले जातें है। 
कवि :मंगल कुमार, कक्षा : 9th,
अपना घर। 

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