सोमवार, 31 मार्च 2025

कविता : " काम करो "

"कुछ काम करो  " 
 सुबह हो गया दोस्तों ,
उठाकर थोड़ा सा काम करो। 
क्या सोते रहोगे दिन भर ,
भविष्य में तुम पछताओगे। 
सुबह हो गया दोस्तों ,
उठकर थोड़ा सा काम करो। 
सोते - सोते मोटा हो जाओगे ,
उठकर थोड़ा काम करो। 
सुबह का ये मौसम बहुत अच्छा होता है। 
जल्दी उठकर काम करो। 
कवि : अवधेश कुमार, कक्षा : 12th,
 अपना घर। 

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