गुरुवार, 12 जुलाई 2012

शीर्षक :- कैसी आजादी

शीर्षक :- कैसी आजादी 
आजाद देश की कैसी आजादी....
जहाँ पर भूखी, आधी आबादी,
अब बढ़ रही ज्यादा महंगाई....
अब नहीं हो पा रही कमाई,
जो गरीब है नहीं चल पा रहा खर्चा....
अमीरों को तो कोई चिंता ही नहीं,
ऐसे ही होता रहा देश में....
तो नहीं मिल पायेगा दाना पेट में,
कवि : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर  
 

बुधवार, 11 जुलाई 2012

शीर्षक :- तारों के पास

शीर्षक :- तारों के पास
पड़ती गर्मी होती बरसात....
फिर मन मेरा होता उदास,
गर्मी में मरते है....
फिर कीचड में फसंते है,
ये गर्मी न होती....
न होती बरसात,
फिर मन मेरा न होता उदास....
सूर्य न होता,
बदल न होते....
न होता ये आकाश,
काश हम होते तारों के पास....
फिर मन मेरा होता क्यों उदास,
कवि : हंसराज कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर 

मंगलवार, 10 जुलाई 2012

शीर्षक :- मन

शीर्षक :- मन 
मन में आते है अनेक विचार....
जिसे मैं पालन करने से डरता हूँ,
न जाने किस वक्त किस घडी....
कौन सी प्रलय आ जाये,
मैं जानता नहीं....
मन के विचार भगवानों,
एवं शैतानों की तरह हैं....
जिसे मैं पालन करने से डरता हूँ,
मन में आते है अनेक विचार....


कवि : लवकुश कुनार 
कक्षा : 9 
अपना घर

सोमवार, 9 जुलाई 2012

शीर्षक :- सावन

शीर्षक :- सावन 
आया सावन छायी हरियाली....
अम्बर में घिरी है घटा काली,
हर जगह अब फैला कीचड़....
पानी से गली है गई भर,
सावन में लगने लगे पेड़ों पर झूले....
बड़े हुए हम वो सब है अब भूले,
खेतों में जब बरसा पानी खुश हुआ किसान....
सूखी धरती में आई फिर से जान,
भीगते हुए बारिश में स्कूल जाना....
झमाझम बारिश में खूब नहाना,
बरसात में है सबको मजा आता....
इसीलिए सावन है भाता,
कवि : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

रविवार, 8 जुलाई 2012

शीर्षक :- हर बात की शुरुआत ही गाली है

शीर्षक :- हर बात की शुरुआत ही गाली है 
गर्मी के मौसम ने....
एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, 
जिसे देखने वाला ही.... 
परेशान हो गया है,
बरसात के मौसम में....
बारिश तो हो नहीं रही,
जो भी आसमान को देखता है....
गाली ही दे रहा है,
बरसात बहुत दिनों के बाद....
आयी तो जरुर है,
लेकिन उसके आने के अंदाज....
तो वाही पुराने हैं,
जिसकी बूंदों से....
लोग ही परेशान है,
जब बारिश की बूंद नहीं थी....
तब मानसून को गाली दिया करते थे, 
जब बारिश की बूंद आयी....
तो बूंदों को गाली दिया करते है,
इस जग के लोग भी....
बहुत परेशान रहा करते है,
जहाँ देखो जिस बात को सुनो....
उसकी शुरुआत ही गाली से किया करते है,
कवि : अशोक कुमार 
कक्षा : 10  
अपना घर

शीर्षक :- भट्टा

शीर्षक :- भट्टा 
भट्टों में जीवन जलता है....
उस आग में ईंटा पकता है,
कामों के बोझ तले दबकर....
बच्चों का बचपन मरता है,
पढ़ना लिखाना दूर की बातें....
काम करना दिन और रातें,
थककर जब आराम करूँ तो....
पेट की भूख जगाता है,
रंग बिरंगे खेल-खिलौने....
बिस्तर नरम और झूले पलने,
राजा रानी परी कहानी....
क्या ये सच में होते हैं,



कवि : महेश 
अपना घर 

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

शीर्षक :- पढ़ाई

शीर्षक :- पढ़ाई 
अपनी इस जिन्दगी में....
पढाई है बहुत जरुरी,
हमेशा अच्छे से पढाई करना....
हो चाहे जितनी मज़बूरी,
जीवन में मुश्किलें आयेंगी बहुत....
इन मुश्किलों से तुम लड़ना,
पढाई अच्छे से करके तुम....
जीवन में कुछ करना,
जब होगा तुमको कुछ ज्ञान....
तभी होगा तुम्हारा सम्मान,
लड़कर मुश्किलों से आगे बढ़ना....
हारकर मुश्किलों से मत पीछे हटना,
कवि : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर 

बुधवार, 4 जुलाई 2012

शीर्षक :- सीख

शीर्षक :- सीख 
ये समय है पढ़ने का....
न तो गलत करने का,
अगर हुई कुछ गलती....
अक्सर कुछ सीख देती है,
इस सीख को जब जीवन में अपनाओगे....
तभी समाज में रह पाओगे,
जो अपने जीवन में गलतियों....
की सीख को अपनाओगे,
तभी तुम एक अलग....
प्राणी कहलाओगे,


कवि : लवकुश कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर  

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

शीर्षक :- मेला

शीर्षक :- मेला 
एक शहर  में लगा हुआ था....
कई दिनों से मेला,
बच्चे बूढ़े सब जाकर देखे....
घूम-घूम कर लगा रहे थे,
चारों तरफ का फेरा....
बच्चे बोले मम्मी-पापा,
झूला दो मुझको झूला....
अगर नहीं झुलाया झूला,
साथ नहीं मैं जाऊंगा....
पूरे मेले में जाकर,
दौड़-दौड़ कर घूमूँगा....
मम्मी-पापा लगे ढूंढ़ने,
अपने प्यारे दुलारे को....
ऐसी गलती कभी न करते,
अपने राज दुलारे से....

कवि : जीतेन्द्र कुमार
कक्षा : 9 
अपना घर

सोमवार, 2 जुलाई 2012

शीर्षक :- क्रिकेट

शीर्षक :-  क्रिकेट 

क्रिकेट ने इस समय मचाया धमाल 
सभी क्रिकेटर हो गए मालामाल 
इस समय क्रिशगेल के शतकों से 
सभी टीमों में आया भूचाल 




मुंबई चेन्नई और कोलकाता 
इन्हीं ने लिखी इस आई0 पी0 एल0की गाथा 
देशी प्लेयर रुके और चले विदेशी 
फुटबाल में पचास गोल मारे मेसी 



कवि : सोनू कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर 

रविवार, 1 जुलाई 2012

शीर्षक :- जिन्दगी जीने का तरीका

शीर्षक :- जिन्दगी जीने का तरीका 
एक बार की बात है। एक किसान के घर में एक बच्चा पैदा होता है। तो उस दिन  उस किसान के घर में खुशियों का माहौल होता है। जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है। तो किसान सोंचता है कि मैं इसे पढ़ा-लिखा कर एक बड़ा आफिसर बनाऊंगा। जिससे इसका नाम संसार में लोग जानेंगे, फिर क्या वो किसान अपने बच्चे को शिखर तक पहुँचाने में जुट गया। इस काम में उसे बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। पर उसका बेटा एक दिन आफिसर बन जाता है। और उसका बेटा रोज काम पर जाता है। काम करके लौट आता है। उसे आफिसर बनने का मन नहीं था। पर क्या करे, घर वालों का प्रेशर था। कि नहीं तुम्हे आफिसर ही बनना है। एक दिन वो अपने कमरे में उदास बैठा था। और सोंच रहा था। कि ये दुनिया संसार और ये अम्बर ये सब क्या है ? और ये दुःख-सुख चोरी ये भ्रष्टाचारी ये तमाम सारी चीजें क्या है ? ये बातें सोंच कर वो उदास बैठा था। तभी उसके पापा उस कमरे में आए और पूछने लगे बेटा क्या हुआ ? तब वो अपने पापा से पूछा पापा ये दुनिया संसार और ये अम्बर ये सब क्या है? इस प्रश्न का जवाब जब उसको आता तब अपने बेटे को दे पता उस समय तो किसान सोंचने लगा बात तो सही कह रहा है। पर किसान इस बात को ताल देता है। और कहता है, ये सब बातें छोडो और अपनीनौकरी पर ध्यान दो इस बात से लड़के को बुरा लगा। वह अपने पिता से बोला पिताजी मैं नौकरी नहीं करूँगा। इस बात पर उसके पापा को गुस्सा आ गया और अपने लड़के को घर से बाहर कर दिया। और कहा जब तुम्हारा मन नौकरी में लगे तब ही आना नहीं तो नहीं आना लड़का बोला ठीक है। और अपना सामान लिया और घर से बाहर चला गया। और अपने प्रश्न का उत्तर ढूढने के लिए रात दिन एक कर दिया। वो जहाँ भी गया वहां चोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचारी जैसा माहौल देखा पर वो थका नहीं। और मन में कहा हो सकता है यहाँ नहीं तो दूसरी जगह इस सवाल का उत्तर मिलेगा वो दूसरी जगह गया वहां उसे घर, खाना सब मिल गया पर वहां भी चोर, बेईमानी और भ्रष्टाचारी लोग ही मिले अंत में वो घूम-घूम कर थक गया। और कहने लगा ये दुनिया संसार और ये अम्बर ये सब क्या है ? इसका उत्तर नहीं मिला। और ये चोरी भ्रष्टाचारी क्या होती है इसका उत्तर मिल गया लगता है इन प्रश्नों का उत्तर यहाँ नहीं है। यह सोंच कर अपनी आखें बंद कर ली। और कहा कि मनुष्य लोंगो के लिया चोरी भ्रष्टाचारी ही संसार ,प्रथ्वी और अम्बर है। सही मायने में ये सबसे बुरी जगह है। यहाँ जो भी जीव-जन्तु जन्म लेते है। तो इस पृथ्वी इस संसार इस अम्बर के लिए कुछ कर के नहीं जाते है। और पापी जैसे काम जरुर सीख लेते है। धीरे-धीरे वो लड़का बूढ़ा हो जाता है। और आखिरी में कह जाता है। कि मैं इसी कीचड़ में रहकर अपनी जिन्दगी गुजार दिया हूँ और आप लोंगो से गुजारिस है। कि इस संसार में जन्म न ही लें तो बेहतर होगा लोगों से प्रार्थना करता हूँ। कि इस पाप से भरे संसार में अपनी प्यार भरी संतान को जन्म न दें और यदि दें भी तो इन पापों से भरी गली से दूर रखे। इतना कहते कहते वो अपना दम तोड़ देता है पर उसे अपने प्रश्न का जवाब नहीं मिला।

शिक्षा :- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है। कि किसी को दबाव में रहकर करने की इजाजत न दें और उचित शिक्षा का महत्व बच्चों को समझाये एवं अपने बच्चों को हर चीज का मतलब बताना चाहिए। संसार प्रथ्वी और अम्बर का सही मतलब एवं संसार में कितने प्रकार के काम, लोग इन के बारे में बताइए फिर उसे नौकरी के लिए प्रेशर देना चाहिए। अगर हम ऐसा करते है, तो हम एक बेहतर समाज बना सकते है। 

लेखक :- सागर कुमार  
कक्षा :- 9 
अपना घर