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बुधवार, 12 सितंबर 2012

शीर्षक:- प्रथ्वी को बचाओ

शीर्षक:- प्रथ्वी को बचाओ 
चल रहा है चक्र। 
बदल रहा है युग।। 
मानव ने तो हद कर दिया है। 
प्रथ्वी को प्रदूषित कर दिया है।। 
मानव ने जंगलों को काट डाला। 
बहुत से जीव-जंतु को मार डाला।। 
अगर ऐसी ही तबाही मचेगी। 
तो प्रथ्वी भी नहीं बचेगी।। 
अभी भी हमारे पास मौका है।
प्रथ्वी को बचाने का।। 
और प्रथ्वी को फिर से।
हरा-भरा और सुन्दर बनाने का।। 
कवि :- ज्ञान कुमार 
कक्षा :- 9 
अपना घर  

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

शीर्षक :- संसार में जीना

शीर्षक :- संसार में जीना 
सोंच समझ कर चलना।
मुसीबतों से बचकर निकलना।।
यह सिखाया जाता है।
सभी जगत के प्राणियों को।।
नहीं आता जिसको समझ में।
जिसे आता है मुसीबतों में पलना।।
वो सीख जाता है संसार में जीना।
कवि:- ज्ञान कुमार 
कक्षा:- 9 
अपना घर 

मंगलवार, 28 अगस्त 2012

शीर्षक :- पानी

शीर्षक :- पानी 
बरस रहा है पानी। 
अब हो रही है सभी को हानि।। 
भर रहा गलियों में पानी। 
अब घर से सभी को।। 
निकलने में हो रही है परेशानी। 
स्कूल जाने में भी हो रही है हैरानी।। 
क्योंकि रोड़ो पर भरा है। 
बरसात का ढेर सारा पानी।। 
कहीं धंस रहीं है रोड़े। 
कहीं मिल रहे बड़े-बड़े गड्डे।। 
बरस रहा है पानी। 
अब हो रही सभी को हैरानी।। 
कवि:- ज्ञान कुमार 
     कक्षा:- 9
अपना घर

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

शीर्षक :- कैसी आजादी

शीर्षक :- कैसी आजादी 
आजाद देश की कैसी आजादी....
जहाँ पर भूखी, आधी आबादी,
अब बढ़ रही ज्यादा महंगाई....
अब नहीं हो पा रही कमाई,
जो गरीब है नहीं चल पा रहा खर्चा....
अमीरों को तो कोई चिंता ही नहीं,
ऐसे ही होता रहा देश में....
तो नहीं मिल पायेगा दाना पेट में,
कवि : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर