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शनिवार, 21 जुलाई 2012

शीर्षक :- बचपन

शीर्षक :- बचपन 
दो साल का बच्चा होते देर नहीं....
इस छोटे से बचपन में,
कापियाँ और किताबों का भार....
हमारे सर बांध देते हैं,
बचपन की जिन्दगी तो....
खेलने की होती है,
लेकिन हमारे माँ बाप....
खेलने कहाँ देते हैं,
बस उनका तो एक ही सपना होता है....
मेरा बेटा आगे चलकर इंजीनियर बनेगा,
कवि : जितेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर  

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

शीर्षक :- दुखी किसान

शीर्षक :- दुखी किसान 
दु:खी किसानो को देखकर....
हाथों पर माथा टेककर,
किसान बस यही सोंचता है....
बरसा दे पानी आधी रात को,
बरसता है पानी रात को....
खेत भर जाते हैं,
किसानो के चेहरे पर....
खुशियाँ झलक जाती है,
बोया है जो फसल....
जब हरी हो जाती है,
फसल में निकला फूल तो....
खुशबू महक जाती है,
कवि : जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

शीर्षक :- मेला

शीर्षक :- मेला 
एक शहर  में लगा हुआ था....
कई दिनों से मेला,
बच्चे बूढ़े सब जाकर देखे....
घूम-घूम कर लगा रहे थे,
चारों तरफ का फेरा....
बच्चे बोले मम्मी-पापा,
झूला दो मुझको झूला....
अगर नहीं झुलाया झूला,
साथ नहीं मैं जाऊंगा....
पूरे मेले में जाकर,
दौड़-दौड़ कर घूमूँगा....
मम्मी-पापा लगे ढूंढ़ने,
अपने प्यारे दुलारे को....
ऐसी गलती कभी न करते,
अपने राज दुलारे से....

कवि : जीतेन्द्र कुमार
कक्षा : 9 
अपना घर

बुधवार, 13 जून 2012

शीर्षक :- गर्मी

शीर्षक :- गर्मी 
सूरज तपता धरती तपती....
गर्म हवा जोरों से चलती,
तन से बहुत पसीना बहता....
हाथ सभी के पंखा होता,
काले बादल काले बादल....
गर्मी दूर भगा रे बादल,
रिमझिम बूंद बरसाना बादल....
झम- झम पानी बरसाना बादल,
गर्मी दूर भागता बादल....
सबको राहत देता बादल,
सूरज तपता धरती तपती....
गर्म हवा जोरों से चलती,
कवि : जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

गुरुवार, 24 मई 2012

कविता :- इंसान

कविता :- इंसान 
इस इन्सान को कड़ी धूप में....
निकलना मुस्किल पड़ता है,
बस इन्सान को ऐसी और....
कूलर में सोने का मन करता है,
इस कड़ी धूप को तो....
किसान ही सह सकता है,
जिसे न तो कूलर की....
हवा नसीब होती है, 
जिसे कूलर और ऐसी की....
हवा नसीब होती है,
उस इंसान से जाकर पूछो.... 
क्या बाहर की धूप को,
झेलना आसान होता है....
नाम :जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर