शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

कविता: "महात्मा गाँधी"

"महात्मा गाँधी"
हमें एक आज़ाद परिन्दा कह कर चले गए है। 
हर साल हमें याद दिलाता है 
सच बोलना भी सिखाया है 
हिन्सा राह पर चलना सिखाया है 
एक लाठी की दम पर ब्रिटिश को मार भगाया 
खून तो सबने बहाया था 
एक आज़ाद भारत को देखने के लिए 
आज़ाद परिन्दे के जैसा अब खुले आसमा में ये उड़ता है 
हर जगह अपना ही नाम लेता है 
हम आज़ाद है ये हर बार याद दिलाता 
फिर चाहे वो 15 August  हो या  26 January 
हर बार तो उन सब  को याद करते है 
हर साल हमें याद दिलाता है 
सच बोलना भी सिखाया है 
 प्यार से बापू उन्हें कहते थे 
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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