"महात्मा गाँधी"
हमें एक आज़ाद परिन्दा कह कर चले गए है।
हर साल हमें याद दिलाता है ।।
सच बोलना भी सिखाया है ।
हिन्सा राह पर चलना सिखाया है ।।
एक लाठी की दम पर ब्रिटिश को मार भगाया ।
खून तो सबने बहाया था ।।
एक आज़ाद भारत को देखने के लिए ।
आज़ाद परिन्दे के जैसा अब खुले आसमा में ये उड़ता है ।।
हर जगह अपना ही नाम लेता है ।
हम आज़ाद है ये हर बार याद दिलाता ।।
फिर चाहे वो 15 August हो या 26 January ।
हर बार तो उन सब को याद करते है ।
हर साल हमें याद दिलाता है ।।
सच बोलना भी सिखाया है ।
प्यार से बापू उन्हें कहते थे ।।
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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