शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

कविता: "ठंडी को मिला मौका"

"ठंडी को मिला मौका"
ठंडी का मौशम आया ,
अग्नि परिक्रिया हुआ सुरू, 
ठंडी में सुबह उठने का मन नहीं करता ,
बिस्तर पर लेते रहने को दिल कहता। 
ठंडी का मौशम आया। 
नहाने पर प्रतिबन्ध लगाया। 
धीरे - धीरे ठंडी बढ़ता ,
 टेम्परेचर 6 से 7 होता जा रहा है ,
ठंडी का मौशम आया, 
अग्नि परिक्रिया हुआ सुरू। कवि 
कवि : अमित कुमार, कक्षा: 11th,
अपना घर। 

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