गुरुवार, 29 जनवरी 2026

कविता: "समय आ गया है"

"समय आ गया है"
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा। 
मन को संभालना है 
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा 
अब पढ़ाई में मन लगाना है 
हर परेशनी में याद करना है 
दिन - रात अब लड़ना है 
आसमा और जमी एक करना है 
हर परिस्थितयों में अब पढ़ना है 
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा 
युद्ध के समान लगता है ये 
रातो को जगाता है ये 
पढ़ाई में मन लगाना है अब 
खेल - कूद बंद पड़ जाएंगे 
90% के हिसाब से तयारी हो रही है  
 कही नींद न आ जाए , पेपर में हम फैल न हो जाए 
इस दर की वजह से हमने तो अभी से ही पढ़ना शुरू कर दिए है 
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा। 
मन को संभालना है 
कवि: नीरज II, कक्षा: 5th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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