"समय आ गया है"
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा।
मन को संभालना है ।।
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा ।
अब पढ़ाई में मन लगाना है ।।
हर परेशनी में याद करना है ।
दिन - रात अब लड़ना है ।।
आसमा और जमी एक करना है ।
हर परिस्थितयों में अब पढ़ना है ।।
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा।
युद्ध के समान लगता है ये ।।
रातो को जगाता है ये ।
पढ़ाई में मन लगाना है अब ।।
खेल - कूद बंद पड़ जाएंगे ।
90% के हिसाब से तयारी हो रही है ।।
कही नींद न आ जाए , पेपर में हम फैल न हो जाए ।
इस दर की वजह से हमने तो अभी से ही पढ़ना शुरू कर दिए है ।।
शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा।
मन को संभालना है ।।
कवि: नीरज II, कक्षा: 5th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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