"पढ़ना हुआ मुश्किल"
अब आसान नहीं है पढ़ना लिखना।
न जाने क्या - क्या नई चीजे आ गई है ।।
जो सोच के परे है ।
अब एक छोटी सी चीज को भी बिस्तार से बताया है ।।
समझना मुशिकल है ।
अब तो नई - नई मशीने आ गई ।।
जिसका एक एक अंग भी पढ़ना है।
न जाने क्या - क्या नई चीजे आ गई है ।।
जो सोच के परे है ।
अब एक छोटी सी चीज को भी बिस्तार से बताया है ।।
समझना मुशिकल है ।
अब तो नई - नई मशीने आ गई ।।
जिसका एक एक अंग भी पढ़ना है।
अब तो खेतो में science पाया जा रहा है ।।
जो जल्द से जल्द फसल उगा रहा है ।
अब आसान नहीं है पड़ना लिखना ।।
जो जल्द से जल्द फसल उगा रहा है ।
अब आसान नहीं है पड़ना लिखना ।।
कवि: सुल्तान कुमार, कक्षा: 11th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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