बुधवार, 21 जनवरी 2026

कविता: "अच्छी पलो कि यादो में"

"अच्छी पलो कि यादो में" 
अच्छी पलो कि यादो में। 
कभी हम भी खोया करते थे 
हार तो हम भी जाते थे अक्सर 
पर हम कभी रोया नहीं करते थे 
उस समय खाना, खेलना और मुस्कुराना था 
 कुछ नहीं था, बस पढ़ाई में मन लगाना था 
अच्छी पलो की यादो में 
कभी हम भी खोया करते थे 
रोया तो नहीं कभी 
पर एक न एक बार हम भी हस लिया करते थे  
अच्छी पलो कि यादो में 
कभी छाव आता, तो कभी धुप 
कभी हवा चलती, तो कभी लू 
पर हम हमेशा आगे बड़ते  रहे 
कवि: गोविंदा कुमार,  कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर" 

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