"अच्छी पलो कि यादो में"
अच्छी पलो कि यादो में।
कभी हम भी खोया करते थे ।।
हार तो हम भी जाते थे अक्सर ।
पर हम कभी रोया नहीं करते थे ।।
उस समय खाना, खेलना और मुस्कुराना था ।
कुछ नहीं था, बस पढ़ाई में मन लगाना था ।।
अच्छी पलो की यादो में ।
कभी हम भी खोया करते थे ।।
रोया तो नहीं कभी ।
पर एक न एक बार हम भी हस लिया करते थे ।।
अच्छी पलो कि यादो में ।
कभी छाव आता, तो कभी धुप ।।
कभी हवा चलती, तो कभी लू ।
पर हम हमेशा आगे बड़ते रहे ।।
कवि: गोविंदा कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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