मंगलवार, 27 जनवरी 2026

कविता: "लड़को की जिम्मेदारी"

"लड़को की जिम्मेदारी"
घर में बड़े हो या छोटे। 
वे अपनी जिम्मेदारी समझते । 
नकारते नहीं कभी न कभी पीछे हटते है । 
जितना हम समझते है । 
लड़के की जिंदगी आसान नहीं होती । 
अपने ही आँसू पी जाते है । 
रोने पर भी वो रो नहीं पाते है। 
अंदर ही अंदर गम सह जाते है । 
ख्वाइस तो है उनकी भी । 
पर कभी वो बता नहीं पाते । 
जितना हम समझते है । 
लड़को की जिंदगी आसान नहीं होती । 
fail हो जाए तो उन्हें भी दुख होता है । 
कही depression में न चला जाए इसलिए खुश रहता है। 
आँसू तो गिरते है उनके भी। 
पर कभी अंदर से टूटते नहीं है।  
 जितना हम समझते है । 
लड़को जिंदगी आसान नहीं होती।। .......
कवि: सुल्तान कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपूर केंद्र. "अपना घर"

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