"खिलते फसले खेत में"
कितना रंगीन है ये खेत - खलियान।
जिसमे चमक रहे है फूल फसलों की ।।
कुछ पीले तो कुछ हरे भी नजर आ रहे है ।
कुछ बड़े तो कुछ छोटे।।
कुछ मुरझाए है तो कुछ खिले ।
कितना रंगीन है ये खेत - खलियान ।।
कवि: अजय II, कक्षा: 6th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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