रविवार, 18 जनवरी 2026

कविता: "खिलते फसले खेत में"

"खिलते फसले खेत में"
 कितना रंगीन है ये खेत - खलियान। 
जिसमे चमक रहे है फूल फसलों की । 
कुछ पीले तो कुछ हरे भी नजर आ रहे है । 
कुछ बड़े तो कुछ छोटे। 
 कुछ मुरझाए है तो कुछ खिले । 
कितना रंगीन है ये खेत - खलियान । 
कवि: अजय II, कक्षा: 6th,
 आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर" 

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