मंगलवार, 27 जनवरी 2026

कविता: "बड़ा भाई"

"बड़ा भाई"
पिता का प्यार देता है वो। 
सारी परेशनियाँ झेलता है वो।। 
घर का बड़ा है। 
इसलिए सारी जिम्मेदारियाँ सम्भालता है वो। 
कभी - कभी तो अपनी खुशियाँ कुबीन कर देता है । 
 छोटे भाई के लिए तो ,
बड़ा भाई एक पिता भी बन जाता है । 
बुझते दीपक का सहारा बनता है । 
खुशियाँ जहाँन की बटोरकर देता है वो । 
बड़ा भाई होकर, एक पिता का साया देता है वो । 
अक्सर लड़ जाता हूँ मैं । 
बच्चा समझ रखा है कहकर,
रुठ जाता हूँ मैं । 
अपना फर्ज वो निभाता है । 
मनाने खुद चला आता है । 
बड़ा भाई ही माँ - पिता का प्यार साथ देता है वो । 
मेरी नासमझी को माफ करता है । 
हर डॉट पीछे प्यार छुपा देता है । 
बड़ा भाई ही माँ - बाप का प्यार देता है । 
कवि:  साहिल कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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