"बड़ा भाई"
पिता का प्यार देता है वो।
सारी परेशनियाँ झेलता है वो।।
घर का बड़ा है।
इसलिए सारी जिम्मेदारियाँ सम्भालता है वो।।
कभी - कभी तो अपनी खुशियाँ कुबीन कर देता है ।।
छोटे भाई के लिए तो ,
बड़ा भाई एक पिता भी बन जाता है ।
बुझते दीपक का सहारा बनता है ।।
खुशियाँ जहाँन की बटोरकर देता है वो ।
बड़ा भाई होकर, एक पिता का साया देता है वो ।।
अक्सर लड़ जाता हूँ मैं ।
बच्चा समझ रखा है कहकर,
रुठ जाता हूँ मैं ।
अपना फर्ज वो निभाता है ।
मनाने खुद चला आता है ।।
बड़ा भाई ही माँ - पिता का प्यार साथ देता है वो ।
मेरी नासमझी को माफ करता है ।।
हर डॉट पीछे प्यार छुपा देता है ।
बड़ा भाई ही माँ - बाप का प्यार देता है ।।
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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