रविवार, 18 जनवरी 2026

कविता : "बीते हुए कल"

"बीते हुए कल"
 मुझे याद आते है वो पल। 
जो हमने बिताए थे कल ।। 
सभी के साथ हस कर खिल - खिलाए थे।  
उसी में एक दूसरे को चिढ़ाए थे ।। 
पर अब उसका कोई भी नहीं है हल । 
मुझे याद आते है वो पल ।। 
जो हमने बिताए थे कल । 
रोजाना आग के पास जाना था।  
आग तापते - तापते एक दूसरे की मौज भी ले लिया करते थे । 
हसी मजाक में ही सही पर बाते कर लिया करते थे।   
हसी दिलाना तो मेरा काम था,
कुछ चीजों के लिए फर्जी में मैं यु ही बदनाम था।  
मुझे याद आते है वो पल ।। 
जो हमने बिताए थे कल । 
कवि : गोविंदा कुमार, कक्षा :9th 
आशा ट्रस्ट कानपुर केंद्र. "अपना घर"

कोई टिप्पणी नहीं: