शुक्रवार, 23 मार्च 2018

कविता : मुस्कुराना सीखा

" मुस्कुराना सीखा "

बच्चों से मैंने मुस्कुराना सीखा, 
जो बनाते हैंनया अफ़साना | 
मुझे अभी बहुत कुछ है सीखना, 
अभी बहुत कम जो मैंने है सीखा | 
 फिर मुझे भी है किसी को सिखाना, 
अपनी सारी बातें किसी को बताना | 
मुझे भी हैं अपने फ़साने को बताना,
अपने सोए हुए अरमानों को जगाना | 
बच्चों से मैंने मुस्कुराना सीखा, 
जो बनाते हैंनया फ़साना | 

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 7th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं समीर कुमार जो की इलाहाबाद के रहने वाले हैं जो कक्षा 7th में अपना घर परिसद में पढ़ते हैं | कवितायेँ लिखने के साथ - साथ गाना भी बहुत अच्छा गाते हैं | 

गुरुवार, 22 मार्च 2018

कविता : बच्चों की माँ

" बच्चों की माँ "  

मैंने देखा घोसले को बार बार 
जिसमें बैठे थे बच्चे चार | 
लगी थी जिसको भूख और प्यास, 
कर रहे थे अपनी माँ का इंतज़ार | 
जब चिड़िया चोंच में दाना लाई, 
अपने बच्चे के मुँह में खिलाई  | 
बड़ी मुश्किल से दाना ला पाती, 
तब वह उनके पेट भर पाती | 
हर कठिनाइयों का सामना करती, 
 पर बच्चों को भूखा नहीं रखती | 
हर पल और हर घड़ी, 
वह रखती है बच्चों का ध्यान | 
काश सबको ऐसी ही माँ मिले, 
जो बच्चे कभी भी न भूले | 

नाम : नितीश कुमार , कक्षा : 7th , अपना घर


कवि परिचय : शाँत स्वभाव के रहने वाले नितीश कुमार कक्षा 7th में पढते हैं  और अपनी कविताओं में ममता का प्यार जैसे भरी कविता लिखते हैं |  जिंदगी से बहुत अरमान हैं कुछ बनने के | 

कविता : मैं वो हवा नहीं जो

" मैं वो बहता हवा नहीं जो "

मैं वो बहता हवा नहीं जो,
हिमालय से टकराकर मुड़ जाता हूँ | 
मैं पल भर का मौसम नहीं जो,
पल भर में बदल जाता हूँ | 
मैं तो वो ऐसा सक्श हूँ, 
जो जिंदगी की राह में | 
लाखों सपने सजाता हूँ, 
क्या करूँ मैं उन सपनों को | 
जिस सपनों को  मैंने सजाया, 
उन सपनों के वजह से ही | 
मैं यहाँ तक आया हूँ, 
निगाहें हैं मेरी उन सपनों पर | 
जिसने मेरी जिंदगी को सरल बनाया | | 

नाम : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं देवराज जो की बिहार के रहने वाले हैं, यह अपना घर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | नृत्य करना, कवितायेँ लिखना और क्रिकेट खेलना इनको बहुत अच्छा लगता है | बड़े होकर एक फिलॉस्फर बनना चाहते हैं | 

बुधवार, 21 मार्च 2018

कविता : काले बादल

" काले बादल " 

पहले काले बादलों ने डराया ,
फिर समंदर जैसे पानी बरसाया | 
बारिश का भी दिन आया,
बूंदों का भंडार लाया | 
गर्मी का तापमान गिराया, 
मेंढक भी खूब टर्र टर्राया | 
किसानों का भी मन बहलाय,
बंजर जमीं को खूब भिगाया |  
बारिश का यही है माया,
कहीं धूप तो कहीं है छाया | 

नाम : कामता कुमार , कक्षा : 6th , अपना घर 



मंगलवार, 20 मार्च 2018

कविता : सर्दी

" सर्दी "

सर्दी की हुई विदाई,
आ गई है गर्मी भाई | 
सूरज दादा आग उगलता, 
इसमें संसार है उबलता | 
मासूम से चेहरे पर पसीना भरा, 
लू जिसको लगा वो मरा | 
सर्दी में की है खूब मस्ती, 
गर्मी में न करो जबरदस्ती | 
जो इसके चक्कर में पड़ा, 
उसकी सामत फिर आयी |  
सर्दी की हुई विदाई,
आ गई है गर्मी भाई | 

नाम : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं अखिलेश मन के मौजी दिल से सच्चा | कविताओं में डैम रखते हैं और मन से लिखते हैं जिससे सभी को पढ़ने में मजे आये | बड़े होकर एक सॉकर प्लेयर बनना चाहतें हैं | 

कविता :गर्मी

" गर्मी "

गर्मी के सीज़न ने ,
कर दिया सबको बेहाल | 
अमीर लोगों ने कुर्सी लेकर,
बैठेंगे पंखे के पास | 
न जाने इस गर्मी ने कर दी, 
बिजली का बिल ज्यादा |  
बिजली का बिल देखकर, 
बहा दिए पसीना | 
अब समझ में आएगा, 
गर्मी का हर एक दिन | 
गर्मी के सीज़न ने, 
बहा दिया सबका पसीना  |  

नाम : संजय कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं संजय जो की झारखण्ड के रहने वाले हैं जब हजार पर थे तो इतनी अच्छी पढ़ाई नहीं थी लेकिन अपनाघर में पढ़कर कवतायें लिखने लगे हैं | स्वभाव से बहुत नरम दिल के हैं | 

सोमवार, 19 मार्च 2018

कविता : मौसम

" मौसम "

क्या मौसम  आया है,
सूरज भी कहर बरसाया है |
गर्मी से लोग हो गए बेहाल, 
पसीने ने कर दिया बुराहाल | 
बच्चे भी हो गए परेशान, 
छुट्टियाँ करेंगी काम आसान |
अभी बचे है चार महीने लगातार,
न जाने क्या होगा अपना हाल | 
क्या मौसम  आया है,
सूरज भी कहर बरसाया है | 

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : य ह हैं कुलदीप जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | डांस न इनका मनपसंद चीज हैं | कवितायेँ कम  लिखते हैं लेकिन मस्त कविता लिखते हैं | 

रविवार, 18 मार्च 2018

कविता : एक दिन

" एक दिन "

सोच रहा था मैं एक दिन,
कुछ अलग हो रहा हर दिन | 
सारे दिन बैठकर सोचें  हम,
मजे से झूमें और गाए हर दिन | 
कभी ख़ुशी हो कभी हो गम, 
लेकिन मत बैठाओ अपना मन | 
ऐसे ही जिए जीवन हम, 
हंसकर जिए जीवन हम | 

नाम : कामता कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर 


शनिवार, 17 मार्च 2018

कविता : अपवाहें

" अपवाहें "

फैली है चरों तरफ अपवाहें,
जाएँ तो हम कहाँ जाएँ |  
मंदिर मस्जिद जैसे बटें हैं घर ,
प्यार से रहने वाले हुए बेघर | 
शांति भी चारदीवारों में छिप गई, 
पीढ़ितों की चिल्लाहट भी गूँज रही | 
उम्मीद के परिंदे भी बैठ गए ,
इस सोच में पड़े रह गए | 
वो शांति भी आएगी, 
वो खुशियाँ भी आएगी |  

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर


 कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | यह बहुत शार्प माइंड के हैं इसीलिए कोई भी चीज को जल्दी पकड़ लेते हैं | जिंदगी में एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और उसी में फोकस कर रहे हैं | 

मंगलवार, 13 मार्च 2018

कविता : मेरी पुस्तक

" मेरी पुस्तक "

मेरी पुस्तक कुछ बोलती है,
अपने विचारों को खोलती है |
 ज्ञान का निर्माण कराती है,
रोते को हँसना सीखती है | 
भटके को मार्ग दिखाती है,
अन्याय से लड़ना सिखाती है | 
न मरती है न जाती है ,
बाँटने पर भी बढ़ती जाती है | 
मेरी पुस्तक कुछ बोलती है,
अपने विचारों को खोलती है | 

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिनकी कविता में दम और जज्बा रहता है | पढ़ाई में बहुत ही होशियार है | हमेशा अपनी कविताओं का गुड़गान करता है | 

सोमवार, 12 मार्च 2018

कविता काश मैं एक किसान होता

" काश मैं एक किसान होता "

काश मैं एक किसान होता, 
फसलों को सही ढंग से उगाता | 
पौधों को भी पानी पिलाता, 
अलग अलग फसल उगाता | 
हरी - हरी खेतों को ,
फसलों को संसार को | 
फसलों को सही उगाता,
काश मैं एक किसान होता |  

नाम : अकीबुल अली , कक्षा : 3rd , अपनाघर 


कवि परिचय : अकीबुल अली असम के रहने वाले हैं यह इनकी पहली कविता जिसको इन्होने पहली बार लिखा है | पढ़ाई में थोड़ा कमजोर हैं लेकिन अच्छे बनने की कोशिश करते हैं | इनको बहुत अच्छा लगा की इन्होने खुद अपनी कविता लिखी |