मंगलवार, 13 मार्च 2018

कविता : मेरी पुस्तक

" मेरी पुस्तक "

मेरी पुस्तक कुछ बोलती है,
अपने विचारों को खोलती है |
 ज्ञान का निर्माण कराती है,
रोते को हँसना सीखती है | 
भटके को मार्ग दिखाती है,
अन्याय से लड़ना सिखाती है | 
न मरती है न जाती है ,
बाँटने पर भी बढ़ती जाती है | 
मेरी पुस्तक कुछ बोलती है,
अपने विचारों को खोलती है | 

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिनकी कविता में दम और जज्बा रहता है | पढ़ाई में बहुत ही होशियार है | हमेशा अपनी कविताओं का गुड़गान करता है | 

1 टिप्पणी:

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी रचना