गुरुवार, 1 मार्च 2018

कविता : सपना

" सपना "

सपनों की एक रात में, 
फसा सपनों के बीच मैं | 
खोज रहा था मैं  
ज्ञान का भंडार, 
कैसा है ये संसार |  
न है कहीं ज्ञान का भंडार, 
समझ में आयी एक बात | 
घूमते जा पहुंचा पुस्तकालय में, 
यह थी ज्ञान से भरपूर | 
एक बार वहाँ  जाकर, 
दोबारा जाने को हुए मजबूर | 
तरह तरह की किताबें थी, 
उसमें बहुत कुछ बातें थी |  

नाम : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : चेहरे से बहुत हसमुख दीखते हैं और बहुत ही चंचल बालक है | कविता बहुत ही काम लिखता हैं लेकिन बहुत अच्छी लिखता है | बड़े होकर एक अच्छे इंसान हो के साथ साथ विद्वान बनना चाहते हैं | 


1 टिप्पणी:

Meena Sharma ने कहा…

बहुत खूब !