गुरुवार, 10 जनवरी 2013

शीर्षक : माँ

          " माँ "
  तू ममता की झोली है ।
 तेरी महिमा जग में न्यारी है।।
 तू साथ समुद्र से भी गहरी है ।
 फिर भी तेरी लहरें  नहीं ।।
 तू ममता की झोली है ।
 तेरी महिमा जग में न्यारी है।।
 तेरे बिना घर गृहस्थी  अधूरी है ।
 तू घर की देवी है ।
तू  है पीयूष चमन की हरदम ।
 तेरे बिन शोक पवन की  चलती ।।
 तू ममता की झोली है ।
 तेरी महिमा जग से न्यारी ।।
 
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा :10
अपना घर , कानपुर 

बुधवार, 9 जनवरी 2013

शीर्षक : मेरा भारत महान


    मेरा भारत महान
सभी देशो से  है महान ।
ये है हमारा प्यार हिन्दुस्तान ।।
लोग यहाँ पर इसका ,
करते खूब गुणगान ।
इसकी महानता का जब पता लगाया ।।
मैं तब कुछ जान पाया ।
घूसखोरी और घोटाला ।
यही है इसकी सबसे बड़ी शान ।।
बहू ,बेटिओं की न इज्जत होती ।
करते है लोग खूब धूम्रपान ।।
इन सब के बावजूद भी ।
भारत मेरा सबसे महान ।।
naam : dharmendra kumar
class : 9
apna ghar , kanpur

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

शीर्षक : महिला की महिमा

     महिला की महिमा 
तुझे देखते ही ।
तेरे पिता ने शीश झुकाया ।।
तेरी माँ को गाली देकर ।
स्त्री तू भी कितनी निराली ।
फिर भी न होती तेरी निगरानी ।।
जब तू एक बच्ची थी ।
अपने माँ के गर्भ से जन्मी थी ।।
घर को दौड़ा आया ।।
पूछने पर ,
मुरझाया सा जवाब पाया ।
माँ को गाली देकर ,
बेटा क्यों नहीं जन्माया ?
बेटे की महिमा ,
बड़ी ही निराली ,
हर महिला इसके चक्कर में ,
होती शोषण का शिकार ,
महिला की यह महिमा है ,
जिससे पुरुष और महिला है ।
महिला की महिमा को पहचानो ।।
फिर शोषण करने की ठानो ,
 स्त्री तू भी कितनी निराली ।
फिर भी न होती तेरी निगरानी ।।
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर , कानपुर 

शीर्षक : चोर

      चोर 
चार चोर की हुई सगाई ।
चारो थे आपस में भाई ।।
चारो एक दिन आये पास ।
ये आपस में थे उदास ।।
एक चोर ने एक बात बताई ।
बोल घर का खर्चा नहीं चलता भाई ।।
चारो हुए एक रात इकठ्ठा ।
बांध कर लाये अपना -अपना गट्ठा ।।
गट्ठे में भरा था  सामान।
रात में उनको दिखने लगा आसमान ।।
रात मे निकले अपने - अपने घर ।
रास्ते मे पुलिस चारो को लिया धर ।।
हो गया उन चोरों का खुलासा ।
टूट गई उनकी घर जाने की आशा ।।
नाम : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शीर्षक : कुछ काम करो

   कुछ काम करो 
इस बार ठण्ड का आया मौसम ।
जिससे की सारा शहर गया सहम ।।
तूने न पहचाना , यह है तेरा भ्रम ।
सर्दी मे भी बोले हर -हर गंगे  हम ।।
सूरज न दिखता ,यह है तेरा है भ्रम ।
सर्दी में कोहरे का दिखता कोहराम ।।
सुन लो बच्चो , सुन लो तुम ।।
छुट्टी मे कर लो आराम ।
इतना भी न करना आराम ।।
किन कोई जन दे तुमको एक भी काम ।
कुछ काम करो और बन जाओ शाबाशी के लायक ।
जिससे कोई न कह पाए मक्कार , निकम्मा नालायक ।।
नाम : आशीष कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर ,कानपुर 

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

शीर्षक : हुई बहस

    हुई बहस 
हुई बहस ,
यह कैसी बहस ,
जिंदगीसे जुड़ी  बहस ,
राहों पर है खड़ी बहस ,
इन्तजार करती बस एक घड़ी ,
बहस हो खड़ी ,बहस से लड़ी ,
सुबह सो कर जल्दी उठने की पड़ी ,
न तो बहस हो जायेगी खड़ी ,
शाम नींदों से भरी ,
रात सोने की पड़ी ,
ये जिंदगी की घड़ी ,
हमको है जीने की पड़ी ,
हो हाथो में छड़ी ,
बहस दूर हो जाए कड़ी ,
नाम :हंसराज कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर , कानपुर 

गुरुवार, 3 जनवरी 2013

शीर्षक: क्या इसके सिवा कोई काम धंधा नहीं

 क्या इसके सिवा कोई काम धंधा नहीं
भाई बहनों  नहीं के नहीं , बाप बेटी का रहा नहीं ।
हवस के इस दौर में , क्या- क्या नहीं ।।
दिल, जिगर , जज्बात सब बिक चुका है ।
बचाना नहीं इंशा नियत खत्म , हैवान जाग गया है ।।
सुरछित नहीं वो , जिसकी जेब मे पैसा नहीं  है ।।
कितनी दर्दनाक मौत हुई उन मासूमों की ।
फैसला जिसका आजतक हुवा नही।।
जानवर से बत्तर जिंदगी जीते हो ।
इंसानियत की राह पर क्यो चलते नहीं ।
क्यों इस राह पर चल पड़ते है लोग ?
क्या इसके सिवा कोई काम - धंधा नहीं
?
                                                                                                    dharmendra kumar
                                                                   class :9

                                                                   apna ghar ,kaanpur
                                                                                                

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

शीर्षक : ग्रामीण महिला और अधूरे सपने

        ग्रामीण महिला और अधूरे सपने 
एक अदद जहाँ घूमने की आजादी मिल जाए अगर ।
सपनो की दुनिया बसाने की एक राह मिल जाए अगर ।।
अपने न भी हो तो कम से कम अपनों का साया मिल जाए अगर ।
रिस्तो का परिवार न सही बस  जिंदगी जीने का एक बहाना मिल जाए अगर ।।
भूखे पेट को भोजन न सही कम से कम अन्न का एक दाना मिल जाए अगर ।
चार दीवारों का आसियान न हो बस रहने का एक  ठिकाना मिल जाए अगर ।।
रेशमी  कपड़ो का ताना  बना   न सही कम से कम तन ढकने को एक टुकड़ा कपड़ा मिल जाए अगर ।
सोना चांदी का आभूषण न हो बस एक चुटकी सिन्दूर का सहारा मिल जाय अगर ।।
दर्द से करहाती देह को दावा न सही कम से कम हाल पूछने वाला कोई मिल जाए अगर ।
मान सम्मान की माला न सही बस स्वाभिमान को जगाने वाला कोई मिल जाए अगर ।।
सुख सौंदर्य न सही कम से कम बहते आसुओ को पोछने वाला कोई मिल जाए अगर
एक अदद जहाँ घूमने की आजादी मिल जाए अगर ।
 सपनो की दुनिया बसाने की एक राह मिल जाए अगर ।।
नाम : के .एम भाई 
अपना घर , कानपुर 

शनिवार, 22 दिसंबर 2012

शीर्षक : रात हमारी

 रात हमारी 
अगर न होती रात हमारी ।।
हमको दिखता उजाला ही उजाला ।
अगर न होता सूरज दिन को ।
कैसे चमकता हमारा वातावरण ।।
पर्वत न  होते ऊँचे - ऊँचे ।
तो इसको पहाडो से बहाता  कौन ।।
 अगर न होती रात हमारी ।।
तो उजाला हमको दिखाता  कौन ।
रात को तारे चमकते है सारे  ।
दिखने में लगते चाँद सितारे ।।
नाम : जितेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

शीर्षक : हो रहा विवाद है

    हो रहा विवाद है 
दूर कहीं एक स्थान है ।
जो देखने में पर्वत के सामान है ।।
वहां जाने का अनोखा विचार है ।
पर उस रास्ते में नहीं कोई इंसान है ।।
लोगों की इच्छा ने जाने की लालसा दी ।
इंसानियत की पहचान दी ।
हम जमाने  के इंसान ने ।।
विश्व में छोड़ दी अपनी परवाह ।
जहां देखो वहां इंसान है ।।
पर उसमे कोई इंसानियत की पहचान नहीं ।
देखने में बड़े प्रकृति वाद है ।।
करते हर दम अपवाद है ।
निकले न उसमे कोई सार ।।
बढ़ता और उसमे विवाद ।
दूर कहीं एक स्थान है ।
जहां विवाद  रहा विवाद है  ।।
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर ,कानपुर  

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

शीर्षक : बचपन

      बचपन 
ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए ?
जब हम खेले थे लुका -छिपी ।।
एक दूजे के मारते थे धप्पी ।
हमें अपने दे दूर करके ।
बचपन के सारे साथी भी गए ।।
ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए ?
बारिस से भरे गड्ढे - नालों में ।।
उस नाव पे बैठाते थे चीटे को हम ।
कागज की नाव बहाते थे संग -संग ।।
हमारी ये खुंशिया कौन ले गए ।
ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए ?
पतंगों की डोर सी अपनी कहानी ।।
बचपन की गलती है हमने मानी ।
फूलो सा खिलाना सिखाया था तुमने ।।
बचपन का गुसा भी  सहते गए ।
 ओ मेरे बचपन कहाँ तुम गए?
नाम : आशीष कुमार 
कक्षा : 1
अपना घर ,कानपुर