शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

शीर्षक : हो रहा विवाद है

    हो रहा विवाद है 
दूर कहीं एक स्थान है ।
जो देखने में पर्वत के सामान है ।।
वहां जाने का अनोखा विचार है ।
पर उस रास्ते में नहीं कोई इंसान है ।।
लोगों की इच्छा ने जाने की लालसा दी ।
इंसानियत की पहचान दी ।
हम जमाने  के इंसान ने ।।
विश्व में छोड़ दी अपनी परवाह ।
जहां देखो वहां इंसान है ।।
पर उसमे कोई इंसानियत की पहचान नहीं ।
देखने में बड़े प्रकृति वाद है ।।
करते हर दम अपवाद है ।
निकले न उसमे कोई सार ।।
बढ़ता और उसमे विवाद ।
दूर कहीं एक स्थान है ।
जहां विवाद  रहा विवाद है  ।।
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर ,कानपुर  

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (23-12-2012) के चर्चा मंच-1102 (महिला पर प्रभुत्व कायम) पर भी की गई है!
सूचनार्थ!