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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

शीर्षक : चोर

      चोर 
चार चोर की हुई सगाई ।
चारो थे आपस में भाई ।।
चारो एक दिन आये पास ।
ये आपस में थे उदास ।।
एक चोर ने एक बात बताई ।
बोल घर का खर्चा नहीं चलता भाई ।।
चारो हुए एक रात इकठ्ठा ।
बांध कर लाये अपना -अपना गट्ठा ।।
गट्ठे में भरा था  सामान।
रात में उनको दिखने लगा आसमान ।।
रात मे निकले अपने - अपने घर ।
रास्ते मे पुलिस चारो को लिया धर ।।
हो गया उन चोरों का खुलासा ।
टूट गई उनकी घर जाने की आशा ।।
नाम : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

शीर्षक :लक्ष्य

    "लक्ष्य " 

सभी को एक लक्ष्य ,
की तलाश होती  है
लक्ष्य तक पहुँचने के लिए ,
एक कठिन राह होती है ...
सभी को कठिनाइयों की राहों से,
एक दिन गुजरना पड़ता है ......
कोई राहों से गुजर जाता है ,
तो कोई राहों से भटक जाता है ।
सभी को एक लक्ष्य ,
की तलाश होती  है ।

नाम : ज्ञान कुमार, कक्षा : 9, अपना घर , कानपुर 

शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

शीर्षक : कुछ तो सीखो

  "कुछ तो सीखो"

बहुत कुछ सीखने को मिलता है ।
हमें अपने वातावरण मे ।।
बन जाता है मौसम अचानक ।
पानी गिराने लगता है गगन से ।।
नहीं किसी को पराया समझाना ।
कभी - कभी  धूप में छाया भी करना ।।
लेकिन नहीं सीख  पाते है हम कुछ ।
अपने वातावरण और गगन से ।।
अपने ब्रम्हाण्ड और धरती से सीखो ।
एक दूसरे की सहायता करना सीखो ।।
नाम : ज्ञान कुमार, कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर 

बुधवार, 21 नवंबर 2012

शीर्षक : यह भी जिंदगी

"यह भी जिंदगी"

क्या इंसान भी वो होते है ।
जो भूखे ही सोते है ।।
नहीं है उनका कोई सहारा ।
भूखा रहता उनका पेट बेचारा ।।
जो देता है उनको दान ।
वो करते है उनका सम्मान ।।
भलाई का जमाना नहीं रहा।
युग कलयुग का चल रहा।।

नाम : ज्ञान कुमार , कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर 

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

शीर्षक : संसार

   शीर्षक : संसार
 संसार के सभी जीवजन्तु ।
 रहते है सब मिलकर ।।
 कुछ जंतु है अनोखे ।
 जिनको हम सभी लोगो ने ।।
 कभी नहीं देखे ।
 प्राकृतिक मे संतुलन ।।
 कैसे बना रहता है ।
 शेर जंगल मे और ।।
 इंसान शहर मे रहता है ।
 अगर ऐसा न होता ।।
 प्राकृतिक मे सन्तुलन न रहता।
नाम : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर