सोमवार, 12 मार्च 2018

कविता : शिक्षा ग्रहण

 " शिक्षा ग्रहण " 

शिक्षा ग्रहण करना है तो, 
पहले विद्यार्थी बनना पड़ेगा | 
ज्ञान ग्रहण करना है तो,
पहले ज्ञानी बनना पड़ेगा | 
ज्ञान का समंदर बहना है तो, 
पहले समंदर बनना पड़ेगा | 
कुछ नया सीखना है तो, 
पहले गुरु बनना पड़ेगा | 
गुरु की जिज्ञासा लेकर, 
तुमको आगे बढ़ना पड़ेगा | 
और कुछ सीखना है तो, 
पहले किताब पढ़ना पड़ेगा |  
शिक्षा ग्रहण करना है तो, 
पहले विद्यार्थी बनना पड़ेगा |  

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह है समीर कुमार जो की इलाहबाद के रहने वाले है | पढ़ाई के साथ साथ गाना गाना बहुत पसंद है और एक गायकर बनना चाहते हैं | खेल में क्रिकेट बहुत पसंद हैं | पढ़ाई में बहुत अच्छे है | 

रविवार, 11 मार्च 2018

कविता ये बदलता मौसम,

" ये बदलता मौसम "

ये बदलता मौसम,
कुछ कहते क्यों नहीं |
चिड़िया की बसेरा,
उजड़ रहे हैं क्यों यूहीं |
क्या जो कुछ हो रहा है,
क्या ये सभी है सही |
ये बदलता मौसम,
कुछ कहते क्यों नहीं |

मनुष्य बड़े ही नादान है,
ज्ञान से सभी अनजान है | 
इनको कोई बताता क्यों नहीं ,
ये बदलता मौसम, 
कुछ कहते क्यों नहीं |

इस धरती ने ही हमें सवारी है, 
पर हमने ही इसे दी बीमारी है | 
क्या हमने की हैयह सही, 
ये बदलता मौसम,
 कुछ कहते क्यों नहीं | | 

नाम : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परीचय : यह है देवराज कुमार जो की बिहार के नवादा जिले से यहाँ रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | पढ़ाई में हमेशा एफर्ट करते है | बड़े होकर एक फिलॉस्फर बनना चाहते है या फिर एक अच्छे डांसर | 

गुरुवार, 8 मार्च 2018

कविता " कोयल "

 " कोयल "

कोयल एक अच्छा  प्राणी हैं,
जिसके पास मधुर वाणी है | 
इसमें संगीतों का भंडार है,,
क्या सुंदर और ताल है | 
मनुष्य को भाता है यह, 
काला है फिर भी गाता है यह | 
बहुत ही चंचल, अच्छा प्राणी  , 
रोज सुनाएगा आपको कहानी | 

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर

   

कवि परिचय : यह है कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और अपनाघर में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं अपनी कविताओं का शीर्षक हमेशा जिव - जंतु पर रखते है | कविताएं लिखने के साथ -साथ डांस भी अच्छा कर लेते हैं | 

मंगलवार, 6 मार्च 2018

कविता : चिड़िया की चाह

"चिड़िया की चाह"

एक छोटी सी चिड़िया उड़ना चाहती है, 
इस संसार के आसमान को छूना चाहती है | 
छोटी है पर दिल के हौसले से उड़ना चाहती है,
जिन्दगी के हर रहस्य तक पहुँचना चाहती हैं |  
जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की, 
 उस हर आश्चर्य चीज को जानना चाहती है |
नाउम्मीद अंधेरों से निकलना चाहती है,
 वह हर डर से निडर होना चाहती है |
जिंदगी से लड़कर जीना चाहती है, 
हौसलों के ताकत से उड़ना चाहती है | 

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th , अपना घर


कवि परिचय : विक्रम के चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनी रहती है. ये मुस्कान ही इनकी ताकत है, जिसके बल पर यह अच्छी कवितायेँ लिख पाते है | कविताओं के साथ - साथ विक्रम पढाई में भी बेहतर स्थान लाते है. | 

कविता : भगवान से प्रार्थना

" भगवान से प्रार्थना "

हमारी जिंदगी पल भर की है, 
ये एक दुनियाँ की सच्चाई है |  
शायद इसीलिए तो लोग, 
उम्र के लिए करते कारवाही | 
फल से भरी थाली लेकर, 
मंदिर में प्रार्थना है करते | 
हाथ जोड़कर कुछ समय, 
उनका ही गुणगान करते | 
सभी इच्छा करते मनचाही, 
हमारी जिंदगी पल भर की है, 
ये ही दुनियाँ की सच्चाई हैं | 

नाम : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं देवराज कुमार जो की बिहार जिले के रहने वाले हैं | पढ़ाई  में बहुत अच्छे हैं और इसके आलावा डांस भी बहुत अच्छा कर लेते हैं| हर वक्त कुछ नया करना चाहते हैं |  

सोमवार, 5 मार्च 2018

होली है भाई होली है ...

होली है भाई होली  है 
रंगों की क्या गोली है 
जगह- जगह पर खेल रहे है 
रंगों से वो क्या बोल रहे है 
मिठ्ठाइयों का यह तत्योंहार है 
यह दिन कितना बेमिसाल है 
बुरा न मानो आज 
होली का त्योंहार है यार ...
होली है भाई होली है 
     रंगों की क्या गोली है ....

                                                     कुलदीप कुमार 
                                                   कक्षा - 5th 

रविवार, 4 मार्च 2018

कविता : सपना

" सपना " 

आज जब मैं सो रहा था,
धीरे धीरे सपने में खो रहा था | 
अपने नए नए सपनों के लिए 
नई नई दुनियाँ खोज रहा था | 
नए त्यौहार नई दिवाली को,
ख़ुशी से सेलिब्रेट कर रहा था | 
सुदर और स्वादिस्ट मिठाइयों के साथ 
खूब पटाखे मैं भी छुटा रहा था | 
एक चिंगारी मेरे आँखों में आई 
देख मेरे भाई तेरी माँ ने बुलाई | 

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | पड़े में बहुत अच्छे हैं लेकिन और भी अच्छा बनना चाहते हैं | हमेशा अपने माता पिता को अपनी रीढ़ मानते हैं और कुछ बनकर उनको खुश करना चाहते हैं | 

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

कविता : " इम्तिहान का महीना

" इम्तिहान का महीना 

इम्तिहान का महीना आया, 
विद्यार्थियों पर कहर है छाया |  
दिमाग को अब काम पर लाया, 
जब इम्तिहान सर पर आया | 
खेल छोड़कर पढ़ने जाना है, 
परीक्षा में अच्छे अंक लाना है |  
बच्चे नक़ल छाप रहे हैं,
 एक दुसरे का मुँह तक रहे हैं  | 
दिमाग कन्फूज़ हो रहा है,
काम आजकल सो रहा हैं |  
न हसना और  न जीना हैं, 
क्योंकि इम्तिहान का महीना है |   

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा :8th , अपनाघर


कवि परिचय : प्रांजुल अक्सर अपनी कविताओं का शीर्षक उस समां के अनुसार लिखते है जिससे की उस समय का अहसास हो | कवितायेँ रोमांचक भी होती हैं | 

गुरुवार, 1 मार्च 2018

कविता : सपना

" सपना "

सपनों की एक रात में, 
फसा सपनों के बीच मैं | 
खोज रहा था मैं  
ज्ञान का भंडार, 
कैसा है ये संसार |  
न है कहीं ज्ञान का भंडार, 
समझ में आयी एक बात | 
घूमते जा पहुंचा पुस्तकालय में, 
यह थी ज्ञान से भरपूर | 
एक बार वहाँ  जाकर, 
दोबारा जाने को हुए मजबूर | 
तरह तरह की किताबें थी, 
उसमें बहुत कुछ बातें थी |  

नाम : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : चेहरे से बहुत हसमुख दीखते हैं और बहुत ही चंचल बालक है | कविता बहुत ही काम लिखता हैं लेकिन बहुत अच्छी लिखता है | बड़े होकर एक अच्छे इंसान हो के साथ साथ विद्वान बनना चाहते हैं | 


कविता : दिलों में मेरे ख्वाइश थी

" दिलों में मेरे ख्वाइश थी "

दिलों में मेरे ख्वाइश थी, 
आँखों में अजमाइस थी | 
 सपने मेरे रंग बिरंगे थे,
पूरा करने को बाकि थे | 
हर रास्ते में अँधेरा ही था, 
उजाले की कोशिश में था | 
मुझको उजाले की जरूरत थी,  
राह के लिए दिल में ख्वाइस थाी |   

नाम : रविकिशन , कक्षा : 8th , अपनाघर

कविता : अपवाहें

" अपवाहें "

फैली है चारो तरह अपवाहें, 
जाएं तो हम कहाँ हम जाए | 
मंदिर मस्जिद जैसे बट गए  घर,
प्यार से रहने वाले हो गए बेघर | 
शांति भी दीवारों में छिप गई,,
पीड़ितों की चिल्लाहटें गूँज रही | 
उम्मीद के परिंदे भी बैठ गए ,
इस सोच में पड़े रह गए | 
वो शांति भी जल्द आएगी, 
वो खुशिया भीचेहरे पर छाएगी  

नाम :  प्रांजुल कुमार , कक्षा :8th , अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | पड़े में बहुत अच्छे हैं | यह चाहते हैं की कुछ लाइफ में बनकर दिखलाना हैं , बहुत सरे लक्ष्य रखे हैं | कवितायेँ बहुत प्रेरणादयक लिखते हैं |