बुधवार, 19 दिसंबर 2012

शीर्षक : स्त्री

           स्त्री
भारत की राजधानी दिल्ली में ।
घटी एक भयानक घटना ।।
पढ़ी - किखी समाज की लड़की को ।
उन दानव ने जिंदगी  कर दी बर्बाद ।।
वह लड़की जिंदगी मौत से कहरा रही है दिन -रात।
रात के दानवों ने आबरू छीन ली ।
और  अधेड़ स्त्री के भाँती सड़को में फेक दिया ।।
आखिर वह भी एक स्त्री है ।
वह भी एक माँ की बेटी  है ।।
जिन लोगों ने ऐसा काम किया ।
उनको गोली मार देनी चाहिए ।।
और सरेआम फांसी पर झुला देना चाहिए ।
नेताओं को केवल सुझाव देना आता है ।।
स्त्री की सुबिधा के लिए कोई काम करना नहीं आता ।
18 घंटो में दिल्ली मे होती है बालात्कार ।।
दिल्ली मे क्यों करते है दरिंदगी नहर चमत्कार ।
22 मिनट मे भी महिलाएं देश भर में नहीं है सुरक्षित ।।
आखित ये मंत्री नेता क्या करते है दिल्ली मे बैठे - बैठे ।
छोटे - छोटे मासूम बच्ची भी है हैरान ।
कुछ लोग है जो उनको दन रात करते है परेशान ।।
हमें ऐसे लोगों के मौत के घाट उतार देने चाहिए ।
ताकि देखा लोगों के रोंगटे खड़े हो जाए ।।
ताकि वह गलत काम करने से पहले एक बार सोचेगा ।
भारत की राजधानी दिल्ली में ।
घटी एक भयानक घटना ।।

नाम : मुकेश कुमार
कक्षा : 11
अपना घर .कानपुर

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

शीर्षक : सोचो फिर चलो

    सोचो फिर चलो 
पहले सोचो फिर समझो ।
फिर करने की ठानो ।।
ये कुदरत की कहानी है ।
हस करके तो देखो ।।
हिम्मत रखो करने की ।
पहले से क्यों डरते हो ।।
चलने से पहले उस पथ में ।
क्यो पीछे हटते हो ।।
कुछ नहीं है ।
हम में तुम में ।।
सब एक जैसी तो है ।
फिर क्यों नहीं चलते एक साथ ।।
कुछ तो है ।
आपस में भेद ।।
जो करने नहीं दे रहा भेट ।
 पहले सोचो फिर समझो ।
 ये कुदरत की कहानी है ।।
डर  कर के तो देखो ।
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा :10
अपना घर , कानपुर 

रविवार, 16 दिसंबर 2012

शीर्षक : उसी पथ से गुजरना है

उसी पथ से गुजरना है 
आसान समझ कर देखो तो ,
हर पथ सरल है ,
उसमे चल के देखो तो ,
हर मोड़ पर पर्वत है ,
उसी मोड़ पर ,
एक और मोड़ है ,
उसमे भी पर्वत की दीवाल है ,
पर उनके लिए ,
हाथो में मजबूती की जरूरत है ,
वह मजबूती दिखाने की नहीं ,
किसी को डराने को नहीं ,
वह हाथो को हाथो मे ,
ल्र्कत चलने वाली है ,
जरूरत हमें इसी की है ,
फर्क खाली इतना है की ,
स्नेह और प्यार को चलना है ,
एक ही पथ से गुजरना है ,
हाथो को हाथो में ,
लेकर चलना है ,
नाम : अशोक कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर , कानपुर 

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

शीर्षक : हिन्दुस्तान हमारा

   हिन्दुस्तान हमारा 
वहां दूर एक जहान है,
नाम जिसका हिन्दुस्तान है ,
लोग वहाँ के जिनके पास ,
न रोटी , न कपड़ा और न ही मकान है
नेताओं की इस राजनीति मे फसकर ,
यंहा का हर एक बंदा परेशान  है ,
आजाद हुए ज़माना गुजर गया ,
लेकिन गरीब अभी परेशान है ,
बालत्कार ,चोरी ,डकैती
इनका भी सबसे ऊपर नाम है ,
नेता ,अफसर सब यहाँ के ऐसे ,
पैसो मई भी इनकी जान है ,
रोज पढ़ता हूँ ऐसी खबरे ,
तो मेरे दिल मे एक उठता है तूफान ,
इस सब के बावजूद भी आज  मेरा ,
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

शीर्षक : हकलाने के कारण

 हकलाने के कारण 
 एक लड़की को मैंने देखा ,
 वह  गरीब 8  साल की होती है ।
वह रोज स्कूल पढ़ने जाती है ,
और हर होम वर्क पूरा कर लती है ।
वह  कहानी सुनना चाहती है ,
वह बाल  सभा के सामने भी आती है।
और वह कड़ी होती है कुछ सुनाने के खातिर ,
लेकिन वह अपना नाम भी नहीं ले पाती  है।
पूछो क्यों ?
क्यों की वह हक्लाती है ,
हकलाने के कारण वह अपनी बाते नहीं बता पाती ,
 जब मैनें उसको हकलाते देखा ,
तो मेरे आखों में आंसू टपकने लगे ,
उसका आने वाला समय क्या होगा ,
उसकी सभी लोग हसीं उड़ायेंगे ,
क्योंकि  वह हक्लाती है ,
और वह अपने बारे में भी नहीं  बोल पाती है ,
लेकिन वह पढ़ना - लिखना अच्छा   जानती 
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 
   

रविवार, 9 दिसंबर 2012

शीर्षक : जीवन यात्रा

    जीवन यात्रा 
जीवन के इस अदभुत संसार मे ,
पाया तूने जो मनुष्य का जीवन ।
इस समाज के लिए है कुछ करना ।
महसूस न करना कभी अकेला पन ।।
जीवन की इस लम्बी यात्रा मे ।
मुश्किले बहुत है आयेंगी ।।
डटकर लड़ना इन मुश्किलों से ,
सफलता तुझे खुद मिल जायेगी ।
पद का अपने मत करना अभिमान ,
देना तुम सबको सम्मान ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर , कानपुर 

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

शीर्षक : उम्मीदों को छोड़ो

शीर्षक : उम्मीदों को छोड़ो
उम्मीदों को छोड़ो ।
हकीकत को मानो ।
पता को पहचानो ।
उस पथ  पर  चलाना सीखो ।
खुद की उमीदो को छोड़ो ।
 बात मानो तो ,
खुद को पहचानो ।
न मिले कोई तो ,
अकले ही चल दो ।
थोडा कष्ट  होगा जरूर ।।
लेकिन पता को पहचान होगी ।
चलने का अनुभव होगा ।।
न  भोजन हो तो भी ।
जल से भूख मिटा लेंगे
हिम्मत करके ।
कुछ करके देखे ।
जो होगा ।।
उसका झेलेंगे ।
लेकिन उम्मीदों को ,
न छोड़ेंगे ।।
इस जग मे भूखे ही ।
 सो लेंगे ।
नींदों को छोड़ेंगे ।।
न मिलेगा इंसान तो ।
पौधों को ही मित्र बना लेंगे ।।
इस धरती को ।
अनंत सा बना   देंगे ।।
 उम्मीदों को छोड़ो ।
 हकीकत को मानो
  नाम : अशोक कुमार
कक्षा 10
अपना घर ,कानपुर 

 

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

शीर्षक : 2012

शीर्षक : 2012
जब आया 2012 का झोका ।
समेट  लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।
चल बसे इस प्रथ्वी से जो मनुष्य ।
घरो मे  मातम आया ।।
रोते माँ ,बाप ,भाई , बहनों को देखा ।
जब 2012 का अंत आया ।।
साथ मे अपने साथ एक दिन लाया ।।
जब आया 2012 का झोका ।
समेट  लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।

नाम : लवकुश कुमार
कक्षा :9
अपनाघर ,कानपुर

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

शीर्षक : हमारे नेता के वादे

शीर्षक : हमारे नेता के वादे
एक बार मुझे सरकार बनाने दो ।
और फिर सत्ता मे आने दो ।।
कसम खुदा की भारत को स्वर्ग बना दूँगा ।
भाषण से अपने गरीबी का भूत भगा दूँगा ।।
सड़क नाली और बिजली पानी ,
ख़तम होगी इन सब की परेशानी ,
मई जनसेवक हूँ थोड़ा पुण्य कमाने दो ,
बस एक बार मुझे सरकार बनाने दो ।।
ऐसे होते  हमारे नेता के वादे ।
सरकार बनाने पर बदल जाते है इनके इरादे

फिर जगह - जगह ये ठेके खुलवाते ।
लेकर के घूस खूब पैसे कमाते ।।
भोली - भाली  सी इस जनता को ।
मीठे - मीठे वांदो का ये जूस पिलाते है ।।
अरबो - खरबों , करोड़ो ,रुपये ये गटक जाते है ।
नाम:  धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा 9
अपना घर कानपुर

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

शीर्षक : सबका अधिकार है

         सबका अधिकार है 
जहाँ देखो चोर ,डकैत अपहरण से भर मार है ।
लड़कियो  को इज्जत नहीं मिलती यही लोगो की गुहार है ।।
लड़कियो  को निकलना बड़ा मुस्किल हो गया ।
यहाँ ,वहाँ शोहदों का घर हो गया ।।
मेरा यही कहना है ।
पुरुषों की संख्या ज्यादा है ।।
लडकियो की संख्या कम है ।
लड़कियो को भी जीने  का अधिकार है ।।
न ही  पुरुषों का अधिकार है ।
नाम : चन्दन कुमार 
कक्षा : 7
अपना घर ,कानपुर 

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

शीर्षक : कुत्ता
काश मै भी सेठ जी का कुत्ता होता ।
तो हमारे मजे ही मजे होते ।
सुबह - सुबह बाइक मे बैठ कर ।।
करता मै भी सैर ।
खाने को मिलता माखन , बिस्कुट ,
प|नी मे होता ताजा दूध ।
खुल जाते भाग्य  हमारे ।।
यदि सेठ के कुत्ते होते हम बेचारे ।
सर्दी की तो बात निराली ,
एक बढ़िया सा होता मेरा बिस्तर ।।
जिस पर  सोता,बैठता ,लेटता ।
सबकी जुंबा पर एक ही पुकार ।।
कोई कहता नीलू ,
तो कोई कहता पीलू ,
तो प्यार से बोलता डॉगी,
तो किसी की  जुंबा पर होता मैगी ।।
न पढ़ना पड़ता न कुछ ,
बैठ - बैठ मिलता सब कुछ ।
यदि मौका मिले तो न चून्कू ,
सेठ के दुश्मन पर बड़े जोर से भौकूँ।

नाम : आशीष कुमार
कक्षा : 10
अपना घर ,कानपुर