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रविवार, 13 जनवरी 2013

शीर्षक : रविवार

            रविवार 
मेरे दिमाग में है ख़ास - बात ।
जो भटक रही है रातो -रात ।।
लोग रविवार को छुट्टी क्यों मनाते हैं ।
रविवार को ही बाजार क्यों जाते है ।।
स्कूल हो या बैंक , कल कारखाना ।
रविवार को ही छुट्टी मनान।।
लोग शनिवार को हही छुट्टी क्यों नहीं मनाते है ।
लोग रविवार को स्कूल क्यों नहीं खुलवाते है ।।
आखिर इतहास क्या ? रविवार का ।
इतना महत्व क्यों है , रविवार का ।।
दोस्त कहे रविवार को आना ।
मेरे घर में खाना खाना ।।
आखिर रविवार है क्या ? 
इसका इतिहास मुझको बतलाओ ।
रविवार , रविवार रविवार ,रविवार ।।
तुम्हारा इतिहास है बड़ा अनजाना । 
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपनाघर ,कानपुर 

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

शीर्षक : हकलाने के कारण

 हकलाने के कारण 
 एक लड़की को मैंने देखा ,
 वह  गरीब 8  साल की होती है ।
वह रोज स्कूल पढ़ने जाती है ,
और हर होम वर्क पूरा कर लती है ।
वह  कहानी सुनना चाहती है ,
वह बाल  सभा के सामने भी आती है।
और वह कड़ी होती है कुछ सुनाने के खातिर ,
लेकिन वह अपना नाम भी नहीं ले पाती  है।
पूछो क्यों ?
क्यों की वह हक्लाती है ,
हकलाने के कारण वह अपनी बाते नहीं बता पाती ,
 जब मैनें उसको हकलाते देखा ,
तो मेरे आखों में आंसू टपकने लगे ,
उसका आने वाला समय क्या होगा ,
उसकी सभी लोग हसीं उड़ायेंगे ,
क्योंकि  वह हक्लाती है ,
और वह अपने बारे में भी नहीं  बोल पाती है ,
लेकिन वह पढ़ना - लिखना अच्छा   जानती 
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 
   

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

शीर्षक : 2012

      "2012" 
 
2012 बड़ा है खतरनाक ।
अमेरिका मे ले आया तूफान ।।
2012 ने दिखा दी अपनी शान ।
जाने कितने मारे गए बेजान ।।
भारत में 2012 का रहा जलवा ।
मुंबई नगरी में मचा दी तबाही।।
इसकी हम कैसे दी गवाही ।
कितने फिल्म स्टारों को ले गया अपने साथ ।।
लेकिन 2012 ने नहीं छोड़ा हमारा साथ ।
2012 को जब याद किया जायेगा ।।
सैंडी तूफान की याद दिलाएगा ।
2012 बड़ा है खतरनाक ।
अमेरिका मे ले आया तूफान ।


नाम : मुकेश कुमार , कक्षा : 11, अपनाघर ,कानपुर 

बुधवार, 14 नवंबर 2012

शीर्षक : दीपावली

 " दीपावली"

दीपावली तो है , आ गई ।
आसमान मे तारे आ गए ।।
जगमग -जगमग करते बादल छा गए ।
लड्डू ,पेड़ा  तुम खूब खाओ ।।
मौज - मस्ती तुम खूब कर आओ ।
थोड़ी दिन के लिए तुम पढाई भूल जाओ ।।
पड़ाका , हथगोला  थोडा कम जलाओ ।
किसी भूखे को थोडा खाना खिलाओ ।।
हर अँधेरे घरों में तुम जाओ ।
एक नन्हा दिया तो जलाओं ।।
नाम : मुकेश कुमार , कक्षा : 11, अपना घर ,कानपुर

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012

शीर्षक : आसमान

शीर्षक : आसमान 

आसमान तो खुला हुवा है ।
पानी झरना जैसे  बरस रहा है।
आओ बच्चो खूब नहाओ ।
हँसो कूदो और गाना -गाओ ।
बचपन है अपना मस्ती का ।
इसमें तुम मस्त -मस्त हो जाओ ।
बचपन हो न पाए पचपन ।
ठहाके मारो लगा के तन-मन ।
आसमान तो खुला हुवा है ।
मारकर ईटा तारे तोड़ो ।
और चाँद सितारे तोड़ो।
बच्चे होते है सच्चे ।
प्यारे - प्यारे दिल के अच्छे ।
आसमान तो खुला हुवा है ।
पानी झरना जैसे  बरस रहा है ।

नाम : मुकेश कुमार, कक्षा : 11,  "अपना घर",  कानपुर