रविवार, 13 जनवरी 2013

शीर्षक : रविवार

            रविवार 
मेरे दिमाग में है ख़ास - बात ।
जो भटक रही है रातो -रात ।।
लोग रविवार को छुट्टी क्यों मनाते हैं ।
रविवार को ही बाजार क्यों जाते है ।।
स्कूल हो या बैंक , कल कारखाना ।
रविवार को ही छुट्टी मनान।।
लोग शनिवार को हही छुट्टी क्यों नहीं मनाते है ।
लोग रविवार को स्कूल क्यों नहीं खुलवाते है ।।
आखिर इतहास क्या ? रविवार का ।
इतना महत्व क्यों है , रविवार का ।।
दोस्त कहे रविवार को आना ।
मेरे घर में खाना खाना ।।
आखिर रविवार है क्या ? 
इसका इतिहास मुझको बतलाओ ।
रविवार , रविवार रविवार ,रविवार ।।
तुम्हारा इतिहास है बड़ा अनजाना । 
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपनाघर ,कानपुर 

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Chander Prakash ने कहा…

lagta nahi aap ki soch itni gehri hai par koi baat nahi is ravivar ko dhundhna padega
aakhir kya raaj hai is ka