शीर्षक : 2012
जब आया 2012 का झोका ।
समेट लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।
चल बसे इस प्रथ्वी से जो मनुष्य ।घरो मे मातम आया ।।
रोते माँ ,बाप ,भाई , बहनों को देखा ।
जब 2012 का अंत आया ।।
साथ मे अपने साथ एक दिन लाया ।।
जब आया 2012 का झोका ।
समेट लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।
नाम : लवकुश कुमार
कक्षा :9
अपनाघर ,कानपुर
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गुरुवार, 6 दिसंबर 2012
रविवार, 4 नवंबर 2012
शीर्षक: डर लगता है
"डर लगता है"
डर लगता है मौसम के बदलने से ।
बीमारी लोग डरते है अच्छे से ।।
डर लगता है शोर -सराबे से ।
धरती को प्रदूषित करते है अच्छे से ।।
डर लगता है अकेले चलने से ।
डर लगता है नियम का पालन करने मे ।।
कही सजा न मिल जाए ।
डर लगता है झूठ बोलने से ।।
कंही हजार बार झूठ न बोलना पड़े।
डर लगता है ज्यादा प्यार करने से ।।
कंही मै इसमें घायल न हो जाऊं ।
बच भी जाऊ तो कंही सम्हाल न पाऊ ।।
डर लगता है मौसम के बदलने से ।
बीमारी लोग डरते है अच्छे से ।।
डर लगता है शोर -सराबे से ।
धरती को प्रदूषित करते है अच्छे से ।।
डर लगता है अकेले चलने से ।
डर लगता है नियम का पालन करने मे ।।
कही सजा न मिल जाए ।
डर लगता है झूठ बोलने से ।।
कंही हजार बार झूठ न बोलना पड़े।
डर लगता है ज्यादा प्यार करने से ।।
कंही मै इसमें घायल न हो जाऊं ।
बच भी जाऊ तो कंही सम्हाल न पाऊ ।।
नाम : लवकुश कुमार , कक्षा : 9 , अपनाघर ,कानपुर
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