स्त्री
भारत की राजधानी दिल्ली में ।
घटी एक भयानक घटना ।।
पढ़ी - किखी समाज की लड़की को ।
उन दानव ने जिंदगी कर दी बर्बाद ।।
वह लड़की जिंदगी मौत से कहरा रही है दिन -रात।
रात के दानवों ने आबरू छीन ली ।
और अधेड़ स्त्री के भाँती सड़को में फेक दिया ।।
आखिर वह भी एक स्त्री है ।
वह भी एक माँ की बेटी है ।।
जिन लोगों ने ऐसा काम किया ।
उनको गोली मार देनी चाहिए ।।
और सरेआम फांसी पर झुला देना चाहिए ।
नेताओं को केवल सुझाव देना आता है ।।
स्त्री की सुबिधा के लिए कोई काम करना नहीं आता ।
18 घंटो में दिल्ली मे होती है बालात्कार ।।
दिल्ली मे क्यों करते है दरिंदगी नहर चमत्कार ।
22 मिनट मे भी महिलाएं देश भर में नहीं है सुरक्षित ।।
आखित ये मंत्री नेता क्या करते है दिल्ली मे बैठे - बैठे ।
छोटे - छोटे मासूम बच्ची भी है हैरान ।
कुछ लोग है जो उनको दन रात करते है परेशान ।।
हमें ऐसे लोगों के मौत के घाट उतार देने चाहिए ।
ताकि देखा लोगों के रोंगटे खड़े हो जाए ।।
ताकि वह गलत काम करने से पहले एक बार सोचेगा ।
भारत की राजधानी दिल्ली में ।
घटी एक भयानक घटना ।।
नाम : मुकेश कुमार
कक्षा : 11
अपना घर .कानपुर
kavita mukesh kumar - bal kavita लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
kavita mukesh kumar - bal kavita लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 19 दिसंबर 2012
रविवार, 30 सितंबर 2012
शीर्षक :- पानी
शीर्षक :- पानी
पानी बरसा झमाझम ।
धान लगाएंगे खेतो मे हम ।।
मक्का भी अब लगायेंगे ।
मक्का खूब हम खायेंगे ।।
किसानो की तो प्रसन्नाता आ गई।
बदल तो पानी बरसा गई ।।
किसानो के खेत लहलहाने लगे।
बादल अब तो पानी बरसाने लगे।।
रात की चाँदनी मे लहलहाएंगे खेत।
खेतो मे नही है कोई रेत ।।
पानी बरसा झमाझम ।
धान लगाएंगे खेतो मे हम ।।
पानी बरसा झमाझम ।
धान लगाएंगे खेतो मे हम ।।
मक्का भी अब लगायेंगे ।
मक्का खूब हम खायेंगे ।।
किसानो की तो प्रसन्नाता आ गई।
बदल तो पानी बरसा गई ।।
किसानो के खेत लहलहाने लगे।
बादल अब तो पानी बरसाने लगे।।
रात की चाँदनी मे लहलहाएंगे खेत।
खेतो मे नही है कोई रेत ।।
पानी बरसा झमाझम ।
धान लगाएंगे खेतो मे हम ।।
नाम :मुकेश कुमार
कक्षा :11
अपना घर ,कानपुर
गुरुवार, 27 सितंबर 2012
शीर्षक :-खेल
शुरू हुआ ट्वेंटी -ट्वेंटी खेल।
मैदानों पर उतरेंगे मेल ।।
जो जीतेगा वही होगा सिकंदर ।
जो जीतेगा वही होगा सेमीफाईनल के अंदर ।।
सभी खेल -खिलाड़ी आयेंगे ।
रनों का अम्बार लगायेंगे ।।
छक्के -चौक्के की कर देंगे बरसात ।
क्यों न बीत जाये आधी रात ।।
गेंदबाज ,गेंदबाजी में हाथ जमायेंगे ।
बल्लेबाज , बल्ले से रन बरसायेंगे ।।
शुरू हुआ ट्वेंटी -ट्वेंटी खेल ।
मैदानों पर उतरेंगे मेल ।।
नाम :मुकेश कुमार
कक्षा :11
अपना घर ,कानपुर
गुरुवार, 24 मार्च 2011
कविता - काम की तलाश में
काम की तलाश में
मैं रोज सुबह उठता हूँ
काम की तलाश में जाता हूँ
काम मिला तो कर लिया
नहीं तो वापस आ गया
घर में यूँ ही बैठकर
कुछ काम करने के लिए सोचता हूँ
अगर काम मिल जाता हैं तो उसे करता हूँ
रोज मेहनत करता हूँ
आखिर इतनी मेहनत क्यों करता हूँ
शुरू से लेकर आखिरी तक मेहनत करता हूँ
बिना रुके बिना झुके खूब मेहनत करता हूँ
जब तक प्राण निकल न जाये
तब तक रोज मेहनत करता हूँ
केवल दो रोटी के लिए मेहनत करता हूँ
शारीर को कभी आराम नहीं दे पता हूँ
ऐसे ही काम करते - करते थक कर मर जाता हूँ
लेखक -मुकेश कुमार
कक्षा - ९ अपना घर , कानपुर
सदस्यता लें
संदेश (Atom)