शनिवार, 15 दिसंबर 2012

शीर्षक : हिन्दुस्तान हमारा

   हिन्दुस्तान हमारा 
वहां दूर एक जहान है,
नाम जिसका हिन्दुस्तान है ,
लोग वहाँ के जिनके पास ,
न रोटी , न कपड़ा और न ही मकान है
नेताओं की इस राजनीति मे फसकर ,
यंहा का हर एक बंदा परेशान  है ,
आजाद हुए ज़माना गुजर गया ,
लेकिन गरीब अभी परेशान है ,
बालत्कार ,चोरी ,डकैती
इनका भी सबसे ऊपर नाम है ,
नेता ,अफसर सब यहाँ के ऐसे ,
पैसो मई भी इनकी जान है ,
रोज पढ़ता हूँ ऐसी खबरे ,
तो मेरे दिल मे एक उठता है तूफान ,
इस सब के बावजूद भी आज  मेरा ,
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

शीर्षक : हकलाने के कारण

 हकलाने के कारण 
 एक लड़की को मैंने देखा ,
 वह  गरीब 8  साल की होती है ।
वह रोज स्कूल पढ़ने जाती है ,
और हर होम वर्क पूरा कर लती है ।
वह  कहानी सुनना चाहती है ,
वह बाल  सभा के सामने भी आती है।
और वह कड़ी होती है कुछ सुनाने के खातिर ,
लेकिन वह अपना नाम भी नहीं ले पाती  है।
पूछो क्यों ?
क्यों की वह हक्लाती है ,
हकलाने के कारण वह अपनी बाते नहीं बता पाती ,
 जब मैनें उसको हकलाते देखा ,
तो मेरे आखों में आंसू टपकने लगे ,
उसका आने वाला समय क्या होगा ,
उसकी सभी लोग हसीं उड़ायेंगे ,
क्योंकि  वह हक्लाती है ,
और वह अपने बारे में भी नहीं  बोल पाती है ,
लेकिन वह पढ़ना - लिखना अच्छा   जानती 
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 
   

रविवार, 9 दिसंबर 2012

शीर्षक : जीवन यात्रा

    जीवन यात्रा 
जीवन के इस अदभुत संसार मे ,
पाया तूने जो मनुष्य का जीवन ।
इस समाज के लिए है कुछ करना ।
महसूस न करना कभी अकेला पन ।।
जीवन की इस लम्बी यात्रा मे ।
मुश्किले बहुत है आयेंगी ।।
डटकर लड़ना इन मुश्किलों से ,
सफलता तुझे खुद मिल जायेगी ।
पद का अपने मत करना अभिमान ,
देना तुम सबको सम्मान ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर , कानपुर 

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

शीर्षक : उम्मीदों को छोड़ो

शीर्षक : उम्मीदों को छोड़ो
उम्मीदों को छोड़ो ।
हकीकत को मानो ।
पता को पहचानो ।
उस पथ  पर  चलाना सीखो ।
खुद की उमीदो को छोड़ो ।
 बात मानो तो ,
खुद को पहचानो ।
न मिले कोई तो ,
अकले ही चल दो ।
थोडा कष्ट  होगा जरूर ।।
लेकिन पता को पहचान होगी ।
चलने का अनुभव होगा ।।
न  भोजन हो तो भी ।
जल से भूख मिटा लेंगे
हिम्मत करके ।
कुछ करके देखे ।
जो होगा ।।
उसका झेलेंगे ।
लेकिन उम्मीदों को ,
न छोड़ेंगे ।।
इस जग मे भूखे ही ।
 सो लेंगे ।
नींदों को छोड़ेंगे ।।
न मिलेगा इंसान तो ।
पौधों को ही मित्र बना लेंगे ।।
इस धरती को ।
अनंत सा बना   देंगे ।।
 उम्मीदों को छोड़ो ।
 हकीकत को मानो
  नाम : अशोक कुमार
कक्षा 10
अपना घर ,कानपुर 

 

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

शीर्षक : 2012

शीर्षक : 2012
जब आया 2012 का झोका ।
समेट  लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।
चल बसे इस प्रथ्वी से जो मनुष्य ।
घरो मे  मातम आया ।।
रोते माँ ,बाप ,भाई , बहनों को देखा ।
जब 2012 का अंत आया ।।
साथ मे अपने साथ एक दिन लाया ।।
जब आया 2012 का झोका ।
समेट  लाया अपने साथ मे मातम का झोखा ।।

नाम : लवकुश कुमार
कक्षा :9
अपनाघर ,कानपुर

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

शीर्षक : हमारे नेता के वादे

शीर्षक : हमारे नेता के वादे
एक बार मुझे सरकार बनाने दो ।
और फिर सत्ता मे आने दो ।।
कसम खुदा की भारत को स्वर्ग बना दूँगा ।
भाषण से अपने गरीबी का भूत भगा दूँगा ।।
सड़क नाली और बिजली पानी ,
ख़तम होगी इन सब की परेशानी ,
मई जनसेवक हूँ थोड़ा पुण्य कमाने दो ,
बस एक बार मुझे सरकार बनाने दो ।।
ऐसे होते  हमारे नेता के वादे ।
सरकार बनाने पर बदल जाते है इनके इरादे

फिर जगह - जगह ये ठेके खुलवाते ।
लेकर के घूस खूब पैसे कमाते ।।
भोली - भाली  सी इस जनता को ।
मीठे - मीठे वांदो का ये जूस पिलाते है ।।
अरबो - खरबों , करोड़ो ,रुपये ये गटक जाते है ।
नाम:  धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा 9
अपना घर कानपुर

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

शीर्षक : सबका अधिकार है

         सबका अधिकार है 
जहाँ देखो चोर ,डकैत अपहरण से भर मार है ।
लड़कियो  को इज्जत नहीं मिलती यही लोगो की गुहार है ।।
लड़कियो  को निकलना बड़ा मुस्किल हो गया ।
यहाँ ,वहाँ शोहदों का घर हो गया ।।
मेरा यही कहना है ।
पुरुषों की संख्या ज्यादा है ।।
लडकियो की संख्या कम है ।
लड़कियो को भी जीने  का अधिकार है ।।
न ही  पुरुषों का अधिकार है ।
नाम : चन्दन कुमार 
कक्षा : 7
अपना घर ,कानपुर 

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

शीर्षक : कुत्ता
काश मै भी सेठ जी का कुत्ता होता ।
तो हमारे मजे ही मजे होते ।
सुबह - सुबह बाइक मे बैठ कर ।।
करता मै भी सैर ।
खाने को मिलता माखन , बिस्कुट ,
प|नी मे होता ताजा दूध ।
खुल जाते भाग्य  हमारे ।।
यदि सेठ के कुत्ते होते हम बेचारे ।
सर्दी की तो बात निराली ,
एक बढ़िया सा होता मेरा बिस्तर ।।
जिस पर  सोता,बैठता ,लेटता ।
सबकी जुंबा पर एक ही पुकार ।।
कोई कहता नीलू ,
तो कोई कहता पीलू ,
तो प्यार से बोलता डॉगी,
तो किसी की  जुंबा पर होता मैगी ।।
न पढ़ना पड़ता न कुछ ,
बैठ - बैठ मिलता सब कुछ ।
यदि मौका मिले तो न चून्कू ,
सेठ के दुश्मन पर बड़े जोर से भौकूँ।

नाम : आशीष कुमार
कक्षा : 10
अपना घर ,कानपुर

शीर्षक : मजदूर

      मजदूर 
 गाँव से दूर .....
एक सुबह को मजदूर ।
आज की दुनिया .....
आज का मजदूर ।।
आज के भी ठेकेदारों ..
 का है कोई जवाब नहीं ।
 एक रात ऐसी नहीं ....
 जो मिले कवाब नहीं ।
 मजदूरों पर क्या बीतती ....
 क्या है उनकी मजबूरी ।
 जो इस तरह जुटकर ....
 दिन -रात करते मजदूरी ।
 नहीं उठता है फावड़ा ....
 फिर करते है काम ।
 क्या इन सब न्र नहीं सुना ....
 एक शब्द भी होता है ''आराम''।।
 आराम की दुनिया में ....
 हराम का पैसा है ठेकेदार ।।
 बेच दो इनको और ....
 छीन लो अपना अधिकार ।।
  गाँव से दूर .....
  एक सुबह को मजदूर ।
  आज की दुनिया .....
  आज का मजदूर ।।
नाम : सोनू कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 

रविवार, 2 दिसंबर 2012

फिर भी मेरा भारत महान

     फिर भी मेरा भारत महान
आजाद हिंदुस्तान की आजाद कहानी ,
हिंदुस्तान की है ये जवानी ,
अनगिनत होते है अत्याचार ,
बनकर नेता करते भष्ट्राचार ,
 आजाद हिंदुस्तान की आजाद कहानी ,
हर नेता करता मनमानी ,
माँ बेटियो पर होते अत्याचार ,
कन्हा गया वो अब शिष्टाचार ,
आँखों मे वो डर बसा है ,
  आँखों मे वो इतिहास रचा है ,
बाहर निकलने  मे भी लगता है डर ,
ये मासूम बेचारे  अब जांए किधर ,
नरक से बद्तर हो गया हिन्दुस्तान ,
  फिर भी कहते हम ,मेरा भारत महान ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

शीर्षक : दुष्ट दरिन्दे

        दुष्ट दरिन्दे 
कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
वो चिल्लाती रहती नहीं - नहीं  ,
फिर भी हम तरस नहीं करते है ।।
फिर कहते है जाने दो यार ,
अपनी बहन कौन , पड़ोसी की है ।।
कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
उनके भी कुछ अरमान होंगे ।।
नहीं सोचते हम उनकी वर्तमान की ।
कैसे वो रहेगी क्या करेगी ।।
नहीं सोचते उनके परिवार के लिए ,
कि उन पर क्या बीतेगी ।।
नहीं सोचते उनके लिए ,
कैसे वो घुट -घुट जियेगी ।।
 कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
 अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
नहीं सोचते उनके समाज के लिए ।
क्या वो मुंह दिखाने लायक रहेगी ।।
 कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
  अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
नाम : सागर कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर