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सोमवार, 3 दिसंबर 2012

शीर्षक : मजदूर

      मजदूर 
 गाँव से दूर .....
एक सुबह को मजदूर ।
आज की दुनिया .....
आज का मजदूर ।।
आज के भी ठेकेदारों ..
 का है कोई जवाब नहीं ।
 एक रात ऐसी नहीं ....
 जो मिले कवाब नहीं ।
 मजदूरों पर क्या बीतती ....
 क्या है उनकी मजबूरी ।
 जो इस तरह जुटकर ....
 दिन -रात करते मजदूरी ।
 नहीं उठता है फावड़ा ....
 फिर करते है काम ।
 क्या इन सब न्र नहीं सुना ....
 एक शब्द भी होता है ''आराम''।।
 आराम की दुनिया में ....
 हराम का पैसा है ठेकेदार ।।
 बेच दो इनको और ....
 छीन लो अपना अधिकार ।।
  गाँव से दूर .....
  एक सुबह को मजदूर ।
  आज की दुनिया .....
  आज का मजदूर ।।
नाम : सोनू कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

देश के जवान

देश के जवान 
आज के जवानों के बांहों में है शक्ति ....
इसीलिए इनमें झलक रही देश भक्ति |
प्राण ये अपने गवां देंगे ....
लेकिन देश को दुश्मनों के हाथ नहीं लगने देंगे |
देश की सुरक्षा है इनका काम....
दुश्मनों का जीना कर देना हराम|
देश की करते है ये ऐसी सुरक्षा ....
सभी को कर देते हक्का बक्का |
आज के जवानों के बांहों में है शक्ति....
इसीलिए इनमें झलक रही देश भक्ति |
नाम: सोनू कुमार 
कक्षा:10 
अपना घर, कानपुर 

रविवार, 20 मार्च 2011

कविता - बादल

कविता - बादल
काले- काले बादल आये ,
साथ में अपने पानी लाये....
छायी चारों तरफ हरियाली ,
फूला समाया न खुशी से माली ....
फूलों ने भर दी हैं बगिया ,
कहते हैं झरने और नदियाँ....
बढ़ी आक्सीजन  खत्म हुई आक्साइड,
अगर हम इंसान न करे पेड़ो से फाइट ....
लेखक - सोनू 
कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर