सोमवार, 18 मई 2009

कविता: गर्मी


गर्मी
हवा चल रही है क्या पुरवाई ।
झूम रही है हर पेड़ की डाली॥
सन - सन चल रही गरम लपट।
पतंग हमारी उड़ रही है फटाफट॥
ऐसे में पतंग भला कौन न उडाये।
इतनी गर्मी में भला कौन न नहाये॥
चलो गर्मी के बहाने लस्सी पिया जाए।
लस्सी पीकर चलो पेड़ के नीचे बैठा जाए॥

कविता: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: अक्षय कुमार, कक्षा ६, अपना घर


3 टिप्‍पणियां:

PREETI BARTHWAL ने कहा…

सुन्दर सरल रचना।

बेनामी ने कहा…

aapaki kavita bahut hi sundar hai beta , aise hi likhate raho . haa apni pyaari-pyaari rachnaayen nanhaman me bhi bhejie aur partiyogita me bhaag leejie | mujhe intjaar rahega aapki rachanaayon ka
seema sachdev

दिव्य नर्मदा ने कहा…

achchhee koshish.