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शनिवार, 11 जुलाई 2009

कविता: पुस्तक

पुस्तक
पुस्तक कितनी प्यारी है।
इनमें जीवन की कहानी है॥
पढ़ने में लगती प्यारी है।
इनमें मज़ेदार कहानी है॥
कलम से लिखी कहानी है।
लेखकों की जिंदगानी है॥
पुस्तक को बच्चें जब पढ़ते है।
जीवन में हरदम आगे बढ़ते है॥
शिक्षा से जीवन अच्छा बनता है।
खुशी से हरदम बच्चा रहता है

लेखक
: अशोक कुमार, कक्षा , अपना घर


शनिवार, 16 मई 2009

कविता: मै भी पढ़ने जाऊंगा


मै भी पढ़ने जाऊंगा
पापा मै भी पढ़ने जाऊंगा।
पढ़ लिखकर महान बनूँगा॥
अच्छे से अच्छा काम करूँगा।
पापा आपका नाम करूँगा॥
पापा मै भी पढ़ने जाऊंगा।
पढ़ लिखकर महान बनूँगा॥
सदा आपका कहना मानूंगा।
गरीबो की हमेशा मदद करूँगा॥
पापा मै भी पढ़ने जाऊंगा।
पढ़ लिखकर महान बनूँगा॥
देश की मै रक्षा करूँगा।
देश की खातिर जान भी दूंगा॥
पापा मै भी पढ़ने जाऊंगा ।
पढ़ लिखकर अच्छा इन्सान बनूँगा॥

कविता: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर
पेंटिंग: मुहम्मद चंदन तिवारी, कक्षा , अपना घर

कविता: परीक्षा


परीक्षा
जब वार्षिक परीक्षा आई।
तो हमार सिर चकराई॥
नींद ऊपर से आई।
जम्हाई अलग से आई॥
पर क्या करे ? पेपर है सिर पर।
लेके कापी बैठ गए छत पर॥
नंबर आई अगर कम।
तो निकल जाई हमार दम॥
यही सोच के हम पछताई।
की परीक्षा कब खत्म हो जाई॥

कविता: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर
पेंटिंग: ज्ञान कुमार, कक्षा , अपना घर