कविता :- मुकेश कुमार बाल कवितायें बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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रविवार, 19 अगस्त 2012

शीर्षक :- धरती

शीर्षक :- धरती 
धरती की है अपनी काया....
धरती की है अपनी माया,
कभी पानी बरसाती है....
कभी पानी को तरसती है,
ये सब है धरती की माया....
धरती प्रकृति को हरा भरा रखती है,
प्रकृति संग धरती....
गंगा में अमृत भरती है,
सर्दियों में कड़कड़ाहट लाती है....
हमें मजा चखाती है,
ये सब धरती की माया है....
इसे बदल नहीं सकता कोई,
धरती से जो टकराएगा....
वह चूर-चूर हो जायेगा,
धरती की तो बात निराली है....
धरती है जो इतनी शक्तिशाली,
धरती की है अपनी काया....
धरती की है अपनी माया,
कवि :- मुकेश कुमार 
कक्षा :- 11 
अपना घर 

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

शीर्षक :- आसमान

शीर्षक :- आसमान 
आसमान क्यों नीला-नीला....
आम क्यों हैपीले-पीले,
बादल क्यों है काले-काले....
क्या हमने कभी ये सोंचा है,
क्या हमने कभी ये जाना है....
रूप को पहचाना है,
आखिर इनमे क्या है खास....
ये बात मुझे नहीं आ रही रास,
उनके विषय में जानना एक कला है....
उनको पहचानना एक राज है,
आसमान क्यों नीला-नीला....
हरा भरा और रसीला,
कवि मुकेश :कुमार 
कक्षा : 11 
अपनाघर 

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

शीर्षक :- मंहगाई

शीर्षक :- मंहगाई 
मंहगाई की है कैसी भरमार....
फिर भी व्यापारी आते है बाजार,
मंहगाई से जनता है बेहाल....
गरीब आदमी का हो रहा है बुरा हाल,
आखिर मंहगाई सरकार क्यों बढाती है....
यह बात हमें समझ नहीं आती है,
अगर व्यक्ति मंहगी सब्जी रोज लायेगा....
तो क्या? वह अन्य खर्च चला पायेगा,
अगर मंहगाई यूँ ही बढ़ती जाएगी....
क्या? जनता हमारी मिटटी खाएगी,
अगर मंहगाई में थोड़ी सी गिरावट आएगी....
तो जनता चैन की साँस ले पायेगी,
मंहगाई की तो बात निराली....
उसने पूरा पैसा कर दिया खाली,
कवि : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर  

रविवार, 24 जून 2012

शीर्षक :- ट्रैफिक जाम

शीर्षक :- ट्रैफिक जाम 
ट्रैफिक -ट्रैफिक -ट्रैफिक....
मेरे शहर का कैसा है, ट्रैफिक,
शहर में लगा रहता है, जाम....
नहीं हो पाते महत्वपूर्ण काम,
जहाँ देखो वहीँ हैं, गाड़ियाँ....
आदि तिरछी लगी हैं, गाड़ियाँ,
सिग्नल देख नहीं है, कोई चलता....
गाड़ी आने पर नहीं कोई रुकता,
गाड़ी जोर से भगा ले जाते....
इसलिए कोई ट्राफिक का पालन नहीं कर पाते,
ट्रैफिक का पालन सभी लोग करने लगेंगे....
गाड़ियों का जाम बंद हो जायेगा,
ट्रैफिक -ट्रैफिक -ट्रैफिक....
मेरे शहर का कैसा है ट्रैफिक,

कवि : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर 

शनिवार, 9 जून 2012

शीर्षक :- वर्षा

शीर्षक :- वर्षा 
वर्षा रानी वर्षा रानी....
जल्दी तुम से आओ न,
इस सूखे भू-मण्डल पर....
पानी तुम बरसाओ न,
फिर से हरियाली आ जाये....
मखमल सी घास लहराए,
फूलों से उपवन भर जाये....
वर्षा रानी वर्षा रानी,
ऐसा जादू कर दिखलाओ....
फिर से अपने साथ वर्षा लाओ,
अपनी वर्षा की फुहारों से....
भीषण गर्मी अब दूर भगाओ,
हमें अब ठंडी हवा दे जाओ....
वर्षा रानी वर्षा रानी,
जल्दी से तुम आओ न....
कवि : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर