प्यारे फूल
कितने प्यारे फूल है।
सबके प्यारे फूल है॥
जब यह महके तो जग महके।
बगिया में खिलते हरदम रहके॥
इनको देख के खुलते अक्ल के ताले।
मन के हट जाते सब जाले॥
नही किसी से इनका बैर।
सब देशो से इनका मेल॥
हर देशो से इनका नाता।
फूल सभी के मन को भाता॥
दुनिया करती इनकी सेवा।
सेवा करो तो पाओ मेवा॥
फूल है दुनिया के नन्हें तारे।
तभी तो है ये सबके प्यारे॥
महक है इनकी कितनी न्यारी।
खुशबू देते कितनी सारी॥
सबके मन को लगती न्यारी।
फूल की दुनिया सबसे प्यारी॥
सबके प्यारे फूल है॥
जब यह महके तो जग महके।
बगिया में खिलते हरदम रहके॥
इनको देख के खुलते अक्ल के ताले।
मन के हट जाते सब जाले॥
नही किसी से इनका बैर।
सब देशो से इनका मेल॥
हर देशो से इनका नाता।
फूल सभी के मन को भाता॥
दुनिया करती इनकी सेवा।
सेवा करो तो पाओ मेवा॥
फूल है दुनिया के नन्हें तारे।
तभी तो है ये सबके प्यारे॥
महक है इनकी कितनी न्यारी।
खुशबू देते कितनी सारी॥
सबके मन को लगती न्यारी।
फूल की दुनिया सबसे प्यारी॥
कविता: अशोक कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
1 टिप्पणी:
जितनी सु्न्दर कविता उतनी ही सुन्दर पेन्टिंग।
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