सोमवार, 19 जनवरी 2026

कविता: "31 दिसम्बर 2025 की दिन"

"31 दिसम्बर 2025 की दिन"
हर साल आता है नए किस्से लेकर। 
पुराना साल गुज़र जाता है उम्मीदे देकर । 
रोती रह जाती है ये गलियाँ । 
गुजरती शाम और चाँद देकर । 
क्या - क्या  किस्से छोड़ जाता है गुजरता साल । 
सारी खामोशी तोड़ देता है एकबार । 
जिक्र नहीं करते है जिसका हम कभी । 
एसी कुछ कहानियाँ भी छोड़ जाता है साल । 
आती हर खुशी वजह होता है साल । 
गुजरती जनवरी को अलविदा कहकर । 
आते दिसम्बर का इन्तजार होता है । 
अधूरे किस्से को पूरा करने के लिए । 
हर बार आता है नया साल । 
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर" 

रविवार, 18 जनवरी 2026

कविता : "बीते हुए कल"

"बीते हुए कल"
 मुझे याद आते है वो पल। 
जो हमने बिताए थे कल ।। 
सभी के साथ हस कर खिल - खिलाए थे।  
उसी में एक दूसरे को चिढ़ाए थे ।। 
पर अब उसका कोई भी नहीं है हल । 
मुझे याद आते है वो पल ।। 
जो हमने बिताए थे कल । 
रोजाना आग के पास जाना था।  
आग तापते - तापते एक दूसरे की मौज भी ले लिया करते थे । 
हसी मजाक में ही सही पर बाते कर लिया करते थे।   
हसी दिलाना तो मेरा काम था,
कुछ चीजों के लिए फर्जी में मैं यु ही बदनाम था।  
मुझे याद आते है वो पल ।। 
जो हमने बिताए थे कल । 
कवि : गोविंदा कुमार, कक्षा :9th 
आशा ट्रस्ट कानपुर केंद्र. "अपना घर"

कविता: "मैं भी जीना चाहता था"

"मैं भी जीना चाहता था"
मैं भी किसी जवाने में खुश रहा करता था। 
न जाने किस ओर से हवाए चली ।। 
मेरी हर  खुशियाँ ले गई
मेरे इस मुस्कुराते चेहरे को उदासी का नाम दे गया 
अब मैं तरसने लगा मुस्कुराने को 
हर एक पल याद आता है वो पल जीने को 
मैं भी जीना चाहता था इस बदलते नया साल में 
पर किस्मत ने भी क्या खेल खेला 
सब कुछ देकर भी सब कुछ ले लिया 
मैं भी किसी जवाने में खुश रहा करता था 
कवि: निरु कुमार, कक्षा:9th,
आशा ट्रस्ट, कानपूर केंद्र. "अपना घर"

कविता: "खिलते फसले खेत में"

"खिलते फसले खेत में"
 कितना रंगीन है ये खेत - खलियान। 
जिसमे चमक रहे है फूल फसलों की । 
कुछ पीले तो कुछ हरे भी नजर आ रहे है । 
कुछ बड़े तो कुछ छोटे। 
 कुछ मुरझाए है तो कुछ खिले । 
कितना रंगीन है ये खेत - खलियान । 
कवि: अजय II, कक्षा: 6th,
 आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर" 

कविता: "ठंडी"

"ठंडी"
ठण्डी का मौसम आया।  
सर्द हवाएँ संग - संग लाया ।।  
ठण्डी का मौसम आया ।   
कोहरा बहुत जयादा आया ।।    
ओस भी खुशी - खुशी घासो पर छाया ।  
ठण्डी का मौसम आया ।।  
सर्द हवाएँ संग लाया ।  
ये मौसम ठंडी का आया ।।  
सर्द हवाएँ संग लाया  ।  
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

शनिवार, 17 जनवरी 2026

कविता: "उम्मीद दिलाने की जरुरत है उसे"

"उम्मीद दिलाने की जरुरत  है उसे"
उम्मीद दिलाने की जरुरत  है उसे। 
दोस्ती कायम रखने का जिगर रखना । । 
दुरियाँ बड़ रही है इस दोस्ती के बीच । 
कुछ न हो सके तो दोस्ती बनाए रखना । 
मैंने माना की गलती हो गई है मुझसे । । 
मैं चाहता हूँ की ये दोस्ती बनाए रखना । 
भरोसा तो मैंने तोड़ा तुम नराज मत होना । । 
आशु तेरे होंगे पर आँख मेरे होंगे । 
रोना मुझे पड़े दोस्ती ही कुछ इस तरह करना। ।  
उम्मीद दिलाने की जरुरत है उसे । 
हमने तुम्हे जान से भी जायदा चाहा । । 
 इस दोस्ती को ठुकराना मत । 
उम्मीद दिलाने की जरुरत  है उसे । । 
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

कविता: "2026 की शुरुआत"

"2026 की शुरुआत"
हो गया है नया साल सुरु। 
नई जोश और नई अंदाज में। 
पुराने चीज पुराने हो गए 
अब नई चीज की शुरुआत हो गए
नई सोच होगी इसमें 
खिल - खिलाते मुस्कान होगी इसमें 
बाटेंगे प्यार सभी में 
न लड़ाई न दुश्मनी होगी कही 
बस एक जुट होगी सभी 
ख़त्म ही जाएगी सारी नफरते 
अब चलो शुरुआत नई करते 
 हो गया है नया साल सुरु 
कवि: सुल्तान कुमार, कक्षा: 11th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

कविता: "कोहरे ठंडी की"

"कोहरे ठंडी की"
ठंडी - ठंडी हवाए बहती है।  
कोहरो की भरमार रहती है।
मौसम थोडा भीगा रहता है। 
 कभी धूप खिल जाता है। 
शाम को जल्दी सूरज ढल जाता है  
सुबह मुशिकिल से किरण मिल पाता है 
ठंडी - ठंडी हवाए बहती है  
कोहरो की भरमार रहती  है
आग के पास ही लोग नजर आएंगे 
बहार निकलते साथ बदल जाएंगे 
अंदर रजाई कि ही सहारा होती है 
बाहर जैकेट से गुजारा है 
कवि: गोविंदा कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

कविता: "नया साल मुबारक हो"

"नया साल मुबारक हो"
 
नया साल आया है
 साथ में कई उम्मीदें लाया है
पुराने यादों को पीछे छोड़ आया है
नया साल में नया खुशियाँ लाया है
नए  सपनो की ओर हाथ बढ़ाया
नया साल देखो है आया।  
कल की गलतियों को माफ़ करते है
आओ साथ मिलकर एक नई शुरुआत करते है। 
थोड़ा सा विश्वास और थोड़ा सा साथ 
और होंगे नये सपने, अपने सकार।
नया साल देखो है आया।  
साथ में कई उम्मीदें लाया है।
 
कवि: रमेश कुमार, कक्षा; 5th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

कविता: "ठंडी को मिला मौका"

"ठंडी को मिला मौका"
 
ठंडी का मौसम आया। 
अग्नि प्रक्रिया हुआ शुरू।  
ठंडी में सुबह उठने का मन नहीं करता । 
बिस्तर पर लेटे रहने को दिल कहता।। 
ठंडी का मौसम आया। 
नहाने पर प्रतिबन्ध लगाया।।  
धीरे - धीरे ठंडी बढ़ता जा रहा है। 
 टेम्परेचर 16 से 6 होता जा रहा है। 
ठंडी का मौसम आया। 
अग्नि प्रक्रिया हुआ शुरू।  
 
कवि : अमित कुमार, कक्षा: 11th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"  

कविता: "मेरे भी सपने है"

"मेरे भी सपने है"
 
सपने मेरे भी है, और उसे। 
पूरा भी करना है।।
चाहे कैसे भी हालत हो।
पर उसे पूरा करना है।। 
सपने कुछ ख़ास नहीं।
पर है कुछ जरुरी।।
हमें पता है उसके लिए।
पूरा मेहनत करना है।।
मेरे भी कुछ सपने है
  कितना भी मेहनत  करना पड़े
उसे पूरा करना है।। 
 
 
कवि : गोविंदा कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र, "अपना घर"