शुक्रवार, 4 मई 2012

कविता :-शिक्षा

शिक्षा 
कक्षा में मैं बैठे-बैठे देख रहा था....
अध्यापक की बातें दिमाग में घोंप रहा था,
सोंचा मैं याद कर लूँ....
अध्यापक से बात कर लूँ,
जब तक अध्यापक के हाथ में छड़ी है....
तब तो बच्चों की शामत खड़ी है,
नाम :लवकुश कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर 

गुरुवार, 3 मई 2012

कविता :-किसी को कुछ याद नहीं

किसी को कुछ याद नहीं 
वृक्ष बड़े कोमल होते है....
ये भी मानों जैसे रोया करते है,
फर्क खाली इतना है कि.... 
ये सभी दुखों और सुखों में शामिल होते है,
इंसान की तरह नहीं कि रूठ जाते....
और किसी के यंहा जाया ही नहीं करते,
यही बड़ी इनकी खासियत की पहचान है कि....
ये किसी को दुःख देते नहीं,
इंसान भी क्या इन्सान है....
वृक्षों की उनको कोई परवाह नहीं,
जब मर्जी उनको गिरा दिया करते है....
यह उनको तो पता नहीं कि,
वृक्षों से ही यंहा इंसान है....
यह किसी इंसान को याद ही नहीं है, 
नाम :अशोक कुमार
कक्षा:9
अपना घर  

बुधवार, 2 मई 2012

कविता:-मंहगाई

मंहगाई 
मंहगाई का भईया ये जमाना....
तो क्या छोड़ दें खाना खाना,
लेकिन अब ऐसा ही हो रहा....
मानव मंहगाई का बोझा ढो रहा,
वायरस की तरह फैलती है, मंहगाई....
इसी कारण भारत में गरीबी आई,
नेता तो हो गए हैं, भ्रष्टाचारी....
परेशान हैं, इससे सब नर-नारी, 
गरीबों का बचा था, सहारा आलू.... 
उसे भी खा मोटे हो गये लालू,
जनसंख्या का भी इस पर पड़ा प्रभाव....
रेसे से कैसे चलेगी गरीबों की नाव,
नाम :धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा :9 
अपना घर  
 

मंगलवार, 1 मई 2012

कविता :-वादों को पूरा करना

वादों को पूरा करना 
अब तो ख़त्म हो गई....
चुनावों की चहल पहल,
अब तो नेता बन गए हैं....
युवा अखिलेश जी,
जनता के सपने पूरा करेगें....
अपने वादों को नहीं वो भूलेगें,
कहाँ कितना खर्च करना....
उनको है लगाना हिसाब,  
अब तो ख़त्म हो गई....
चुनावों की चहल पहल,

नाम :ज्ञान कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर 

रविवार, 29 अप्रैल 2012

कविता :-बागों में आये आम निराले

बागों में आये आम निराले 
बागों में अब आये आम....
उनके बढ़ जायेंगे दाम,
पेड़ों में है, आम निराले....
उनके रंग है, हरे और पीले,
बागों में हम जायेंगे....
तोड़ आम खूब खायेंगे,
आमों से अब उपवन महका....
चिड़ियों से अब उपवन चहका,
आम फलों का राजा है....
जिसको खाने का कुछ अलग मजा है,
आम से आचार और जूस बनाओ....
उसको तुम भरपेट खाओ,
बागों में अब आये आम....
उनके बढ़ जायेंगे दाम,
   नाम : मुकेश कुमार
कक्षा :10 
अपना घर 
  

शनिवार, 28 अप्रैल 2012

कविता :-मौसम नें बदला मिज़ाज

मौसम नें बदला मिज़ाज
मौसम नें बदला मिज़ाज....
बादलों नें आसमां को दिया साज,
हवा चल रही है, अपने धुन में....
पेड़ों की डाली हिलाए संग में,
खेतों में गेंहू की बाली लहलहाती....
जो किसान के मन को भाती,
मन ही मन सोंचता और कहता....
अन्न से भर दे कोठी दाता,
कहीं धुप है, कहीं छाँव है....
बागों के बीच गाँव है,
हमको लगता है, सबसे प्यारा....
जो है गाँव हमारा,
इस मौसम में यदि पानी बरसा....
बड़े जोर की ठण्ड पड़ेगी सहसा,
ये है मौसम का मिज़ाज...
कोई न जाने कब कर ले, सब पर राज,
नाम :आशीष कुमार 
कक्षा :9 
अपना घर
 

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

कविता :-सहारा

सहारा
इस काले अंधेरे में....
हमें उजाला चाहिए,
आये हुए पतझड़ में....
हमें सहारा चाहिए,
इस तरह अनगिनत....
हममें से निकलते रहेगें,
और कुछ इसी तरह....
इस दुख को सहेगें,
बस इसी तरह....
गर मिलता रहा सहारा,
तो हम ये लेते है प्रण....
जल्द ही दूर हो जायेगा,
ये अशिक्षा का पारा....
नाम :सोनू कुमार 
कक्षा :10 
अपना घर 

गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

कविता :-एक सरकार

एक सरकार
समय आ गया अब तो....
तुम सब के सब जग जाओ,
सभी लोग देने जाओ वोट....
अपनी एक अलग सरकार बनाओ,
करो चुनाव तुम एक....
जिम्मेदार अपने एक नेता का,
जो दे तुम्हे एक डगर....
सफलताओं से भरे विकास का,
तुम्हारा विकास हो ऐसे कि....
आसमान छु लो तुम,
अपने सपनों का एक....
आसमान बुन लो तुम,
समय आ गया अब तो....
तुम सब के सब जग जाओ,
सभी लोग देने जाओ वोट....
अपनी एक अलग सरकार बनाओ,
नाम :सोनू कुमार 
कक्षा :10 
अपना घर 

बुधवार, 25 अप्रैल 2012

कविता :-चुनाव

चुनाव 
शुरू होते ही चुनाव के, नेता जी आते....
करके मीठी बातें, है हमें फसातें,
पांच साल के पहले, वे नजर नहीं आते....
आज के नेता बड़े कंजूस,
मार के मक्खी और पीते जूस....
पड़े-पड़े है भाषण देते,
बैठ के गद्दे पर, विस्की लेते.... 
शुरू होते ही चुनाव के, नेता जी आते....
करके मीठी बातें, है हमें फसातें....
नाम :जमुना कुमार 
कक्षा :6 
 अपना घर

कविता :-मानव

मानव 
इस दुनिया खतरनाक प्राणी है मानव....
जो वर्तमान काल में बन गया है दानव,
परमाणु, अणु और हथगोलों को बनाया....
उसकी ले कर मदद हिरोशिमा, नागाशाकी को उड़ाया,
मानव अपने भाग्य का विधाता है....
मानव अपने भाग्य का ज्ञाता है,
सबसे खतरनाक प्राणी, दो पैरों वाला है.... 
सम्पूर्ण विश्व ये, दो पैर वालों से ही डरता है,
पूरी पुस्तक में मानव का चित्र है....
और दो पैरों वाला मानव, वाकई में विचित्र है,
पूरे विश्व में मानव की पहचान है....
इतिहास के पन्नों पर, उसका ही गुणगान है,
नाम :मुकेश कुमार
कक्षा :10
अपना घर

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

कविता :-भ्रष्टाचारी संसार

भ्रष्टाचारी संसार 
जिन्दगी की राहों में....
आँखों की पलकों और निगाहों में,
दुःख सुख ही क्यों होता है....
स्वर्ग क्यों नहीं होता है,
इस भ्रष्टाचार के संसार में....  
पहले बेटा बाद में पिता क्यों होता है,  
पहले बेटा बाद में नाती होता है....

नाम :हंसराज कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर