कविता :- सोनू कुमार बाल कहानियाँ बाल कवितायेँ बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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शनिवार, 11 अगस्त 2012

शीर्षक:- प्रकृति

शीर्षक:- प्रकृति
प्रकृति को इस वक्त....
जो दिया जा रहा धोखा,
एक दिन जरुर आएगा....
प्रकृति का दिया हुआ झोका,
जिसमें होगा सब कुछ....
मर मिटने को तैयार,
इसीलिए तो मैं कहता हूँ....
इतने अत्याचारी न बनो यार,
प्रकृति को जब अपना....
खुमार आ जायेगा,
तो इन हत्यारों को....
बुखार आ जायेगा,
उस खुमार की आंधी में....
जब सब कुछ उठ जायेगा,
तब किसी कोने में बैठ....
वही हत्यारा चिल्लाएगा,
तब जो भी उस वक्त....
रोता हुआ पाया जायेगा,
तो शायद वह केवल गीत गायेगा....
मैं तो चाहता हूँ की तुम,
अभी से गीत गाते रहो....
प्रथ्वी यूँ ही सुख चैन से चलाते रहो,
उस समय जो भी....
गुमसुम सा जायेगा पाया,
उसके द्वारा यही....
गीत जायेगा गुनगुनाया,
इन खुबसूरत फूलों से....
सजी इस धरती को मत उजाड़ो,
इस न्यारी सी धरती को....
कवि :- सोनू कुमार
कक्षा :- 11
अपनाघर

सोमवार, 16 जुलाई 2012

शीर्षक :- मौसम बसंत का

शीर्षक :- मौसम बसंत का 
बसंत का वो मौसम....
जिसमें रातें सुहावनी हुआ करती थी, 
और उसके दिन अक्सर....
बारिश की बूंदों में भीगा करते थे,
हमें मजा तो आता था उस वक्त.... 
जब हम स्कूलों को बसों में चला करते थे,
बैठ कक्षाओं में दोस्तों के साथ....
हम बूंदों को गिना करते थे,
अभी भी हमें याद है वो शाम....
जब हम भीगते हुए घरों को आया करते थे,
दोस्तों के साथ घरों में हम....
अक्सर कुछ पल बिताया करते थे,
बैठ कर उन्ही घरों में....
हम मीठी-मीठी बातें किया करते थे,
या फिर बरसात के समय हम....
किसी दुकान पर चाय पिया करते थे,
अगर हम चाह लें तो भी....
वो हमसे भुलाये नहीं जाते हैं,
क्योंकि ये हैं वो क्षण....
हर बरसात दोहराए नहीं जाते हैं,
कवि : सोनू कुमार 
                                            कक्षा : 11
अपना घर

मंगलवार, 5 जून 2012

कविता :- अँधेरा

कविता :- अँधेरा 
एक अँधेरे घर में....
एक दीपक का हुआ अविष्कार,
तभी आ एक उससे पत्थर टकराया....
प्रथ्वी ने एक जन्म सा पाया,
करोंडो वर्षों बाद हुआ....
इस संसार का अविष्कार,
आज कलयुग का मनुष्य....
प्रकति का कर रहा शिकार,
ऐसा ही अगर होता रहा....
तो नहीं रहेगी ये धरा,
नहीं रहेगा ये दीपक....
और छा जायेगा अँधेरा,
नाम : सोनू कुमार 
कक्षा : 11 
अपना घर  

सोमवार, 21 मई 2012

कविता :- आजादी

आजादी 
आजादी क्या चीज है....
क्या इसका किसी ने बोया बीज,
ये सब क्या बकवास है....
इसका मुझे भी एहसास है,
जहाँ बोलने की न हो गल....
वंहा पर बसे राजतंत्री दल,
पूरी बात नहीं हैं सुनते....
सिर्फ हैं वो अपनी कहते,
जहाँ बोलने का हो हक़....
आजादी कहलाएगी बेसक,
जहाँ मनुष्य का न हो बोल-बाला....
वंहा जरुर होगा राजतन्त्र वाला,
नाम : सोनू कुमार 
कक्षा :11
अपना घर

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

कविता :-सहारा

सहारा
इस काले अंधेरे में....
हमें उजाला चाहिए,
आये हुए पतझड़ में....
हमें सहारा चाहिए,
इस तरह अनगिनत....
हममें से निकलते रहेगें,
और कुछ इसी तरह....
इस दुख को सहेगें,
बस इसी तरह....
गर मिलता रहा सहारा,
तो हम ये लेते है प्रण....
जल्द ही दूर हो जायेगा,
ये अशिक्षा का पारा....
नाम :सोनू कुमार 
कक्षा :10 
अपना घर