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शनिवार, 8 सितंबर 2012

शीर्षक :- क्या वह आदमी है

शीर्षक :- क्या वह आदमी है 
क्या वह आदमी है।
उसके दो पैर है।। 
और दो हाथ है। 
क्या वह आदमी है।। 
हाथ में कटोरा है। 
और भीख मांग रहा है।। 
अपने पापी पेट के लिए। 
इस पेट से मजबूर है।। 
पेट की भूख से चूर-चूर है। 
क्या वह आदमी है।।
कवि:- मुकेश कुमार 
कक्षा:- 11
                                           अपना घर 

शनिवार, 23 जून 2012

शीर्षक :- अँधेरे में चन्द्रमा

शीर्षक :- अँधेरे में चन्द्रमा 
रात के अँधेरे में....
चन्द्रमा के घेरे में,
 


सूरज की बांतो में....
तारों की रातों में,
जग-मगा रहे थे तारे....

चंद्रमा व सूरज लग रहे थे प्यारे,
मन करता है उनको छुलूं....
मन करता है उनसे बोलूं,
उनको अपने पास बुलाकर....
अलग-अलग सवाल मैं पूछूं,
रात के अँधेरे में चंद्रमा के घेरे में....





कवि : मुकेश कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर  

बुधवार, 30 मई 2012

कविता :- पढाई

कविता :- पढाई
पढ़ने का ओना एक मजा है....
लेकिन हमें क्यों मिलती सजा है,
पढ़ने से मिलती है अधिक जानकारी....
पढ़ने से पता चलता है सत्य असत्य का ज्ञान,
तब हमारे समाज में बदला है विज्ञान....
किस तरह पढ़ना चाहिए एक कुशलता है,
पढ़ने से हमें मिलती सफलता है....
पढ़ने से हम सिखाते है,
हमें कैसा व्यव्हार करना चाहिए....
और सीखते है बड़े बूढों के,
सामने कैसे बैठना चाहिए....
यह सब पढ़ने का ही मजा है,
अगर पेट के लिए खाना जरुरी है....
तो मस्तिष्क के लिए पढ़ना जरुरी है,
किताबें कैसे पढ़ना है यह जान लो....
इन्ही से दोस्ती करना है यह मन लो,
नाम : मुकेश कुमार
कक्षा : 10
अपना घर

मंगलवार, 22 मई 2012

कविता :- खिले फूल

कविता :- खिले फूल
फूल हैं डाली-डाली.... 
माली तोड़े हाली-हाली,
वन उपवन में खिलते फूल....
नहीं पा रहे हँसना भूल, 
फूल पत्तियों का है अपना मौसम....
मरने जीने का उनको भी होता है गम,
फूलों में होती है तमाम विशेषता....
फूलों में होती है एकता,
फूलों से माला बनती है....
देवी देवताओं के गले में चढ़ती है,
फूल के बिना है उपवन सूना....
फूलों की डाली को मत छूना,
फूल का है अंदाज निराला....
नहीं उसे कोई मारने वाला,
फूल हैं डाली-डाली.... 
माली तोड़े हाली-हाली,
नाम : मुकेश कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर  

बुधवार, 25 अप्रैल 2012

कविता :-मानव

मानव 
इस दुनिया खतरनाक प्राणी है मानव....
जो वर्तमान काल में बन गया है दानव,
परमाणु, अणु और हथगोलों को बनाया....
उसकी ले कर मदद हिरोशिमा, नागाशाकी को उड़ाया,
मानव अपने भाग्य का विधाता है....
मानव अपने भाग्य का ज्ञाता है,
सबसे खतरनाक प्राणी, दो पैरों वाला है.... 
सम्पूर्ण विश्व ये, दो पैर वालों से ही डरता है,
पूरी पुस्तक में मानव का चित्र है....
और दो पैरों वाला मानव, वाकई में विचित्र है,
पूरे विश्व में मानव की पहचान है....
इतिहास के पन्नों पर, उसका ही गुणगान है,
नाम :मुकेश कुमार
कक्षा :10
अपना घर