रविवार, 13 नवंबर 2011

मंहगाई

कविता - मंहगाई
 मंहगाई का आया जमाना ,
 महंगा को गया खाना-दाना.....
 घोटाले बाजों का कहना ,
मंहगाई में हमको रहना .....
इसी बात तो देख मंहगाई ,
गरीबों को याद आयी नानी .....
बन्द को गया दाना- पानी,
आम आदमी भोला भाला .....
2g ने किया घोटाला,
मंहगाई का आया जमाना .....
 महंगा हो गया खाना- दाना.....
 लेखक - सोनू कुमार  
कक्षा - १० अपना   घर ,कानपुर  

-आस -पास परिवर्तन

कविता -आस -पास परिवर्तन 
 ये मौसम में क्या परिवर्तन को रहा हैं ,
हर चीज में परिवर्तन हो रहा हैं ....
परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं ,
 प्राकृतिम  कृत्रिम होते हैं....
 कभी हवा तेज चलती हैं,
 कभी गर्म चलती हैं ....
 जो तीव्र गति से चलतीa हैं,
 वह तीव्र पवन कहलाती हैं .....
 जो परिवर्तन  मंद गति से होता हैं ,
वह  मंद परिवर्तन कहलाता हैं......
 लेखक -चन्दन कुमार 
 कक्षा -६ अपना घर ,कानपुर

देश

कविता - देश 
 जो देश बिगड़ चुका हैं उन्हें फिर सुधारिए,
ये कहना तो आप मेरा मन जाइये  .....
डर लगता हैं इन नेताओं से ,
 कही फिर से इसे बेच न  दे ....
अगर बेचा  तो फिर दुबारा संभलेगा नहीं,
बचाना हैं तो इन नेताओं को हटाना हैं ...
जो देश बिगड़ चुका हैं उन्हें सुधारिए ,
 ये कहना तो आप मेरा मान जाइये ......
लेखक - सागर कुमार 
कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर   

शनिवार, 12 नवंबर 2011

मेहनत

कविता -मेहनत 
 रात- दिन हो गयी एक ,
 खून पसीना कर दिया एक......
 इस  मेहनत की कमाई से ,
सुख से जियेगे हम .....
 आज के इन नेताओं की तरह,
नहीं करेगे हम घोटाले .......
क्योकि इस देश में ,
बहुर हैं भूखे मरने वाले ...... मेहनत
लेखक -ज्ञान
कक्षा - ८ अपना घर, कानपुर 
      

सफ़र जिन्दगी का

कविता -  सफ़र जिन्दगी का 
 जिस पथ में चला हैं ,
वह पथ बहुत कठिन हैं.....
 जैसे कि प्रथ्वी के तीन भाग में जल हैं,
और एक भाग में जमीन हैं ......
समय नहीं करता हैं इंतजार ,
आप चाहे जितना करे विचार......
आपका हैं इतना कठिन सफ़र ,
यदि पथ से भटके तो न होगा बेडा पार.....
 ये सफ़र हैं आपकी जिन्दगी का ,
अब समय इंतजार न करेगा आप का.....
पथ में कांटे भी आयेगे ,
लोग भी आप को सतायेगे......
आप किसी से न दरियेगा ,
आप अपने लक्ष्य में अडिग रहकर चलियेगा......
लेखक - आशीष कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर, कानपुर  

आओ करे विचार

कविता - आओ करे विचार 
 दो -दो चार ,
 आओ करे विचार.....
 चार थे साथी ,
 उनके पास नहीं था हाथी....
 जिसके कारण से थे वे उदास,
 चारो मिलकर रहते साथ .....
दो -दो चार ,
 आओ करे विचार......
 लेखक - ज्ञान 
 कक्षा - ८ अपना घर , कानपुर

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

शीर्षक - पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से

कविता - पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से 
 पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से ,
हवा चली हैं शोर -शोर से .....
 गगन में  सब नाचे गए ,
 सुबह -सुबह जैसे खेत लहाराये.....
 पेड़ो की डाले यूँ बहके ,
 बागो के सरे फ़ूल महके......
 शुध्द हवा दे रही ताजगी ,
 अब न रहेगी गन्दगी......
 यहाँ का मौसम सब को भाता,
बिन मांगे  बारिस करता ........
यहाँ का जाड़ा सबको भाता ,
 बिन बुलाये सर्दी लाता ......
 गर्मी भी सबको भाये ,
 यहाँ का मौसम गर्नी में ठंडी हवा बहाये......
 पक्षी उड़े हैं जोर -जोर से ,
 हवा चली हैं शोर- शोर से ........
 लेखक -आशीष कुमार 
 कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर

बुधवार, 9 नवंबर 2011

कविता : गलतियाँ

 गलतियाँ

मेरे मन में एक विचार आता है ,
वह मुझे बेहाल कर देता है ....
मै प्रतिदिन सोचता हूँ,
आखिर गलतियाँ हमसे क्यों होती हैं....
मैं गलतियाँ नहीं करना चाहता हूँ ,
गलतियाँ तो सभी करते हैं ....
बच्चे हों या बूढ़े हों ,
गलतियाँ कुछ बड़ी और छोटी होती हैं.....
अगर गलतियाँ होती हैं तो ,
उस पर सुधार करना चाहिए.....
लेकिन गलतियाँ क्यों होती हैं ,
इस पर विचार करना चाहिए .......

लेखक : मुकेश कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर
 

रविवार, 6 नवंबर 2011

कविता : नहीं मिलेगी अब सजा

नहीं मिलेगी अब सजा 

सुनों-सुनों सब भाई बहना ,
सावधान तुम रहना ....
क्योंकि ठंडी आने वाली है,
सबको थर-थर कपाने वाली है.......
ठंडी का मौसम है सुहाना,
सब मिलकर अब गाओ गाना .......
ठंडी में है अब बहुत मजा,
क्योंकि स्कूल में नहीं मिलेगी सजा.......


लेखक : मुकेश कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर 

बुधवार, 2 नवंबर 2011

कविता: पटाखे

पटाखे 

पटाखे की आयी बारात,
दीपावली है साथ आयी .....
गया अन्धेरा आया उजाला,
उजाले में आयीं हैं लक्ष्मी .....
घर में भर गयीं है कितना धन,
धन को अच्छे से है रखना ....
पटाखे की आयी बारात ,
दीपावली है साथ आयी ....
लेखक : चन्दन कुमार 
कक्षा : 6
अपना घर  

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

कविता : पृथ्वी

 पृथ्वी

पृथ्वी पर है कितना भार,
इस पर चलती मोटर-कार....
पानी भरा है इसमें प्यारा,
पहाड़-झरनों से निकला सारा....
जब तेजाबी वर्षा होती ,
पृथ्वी पर विनाश की क्रिया होती है.....
पृथ्वी पर कितना भार,
इस पर चलती मोटर-कार.....

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर