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मंगलवार, 1 नवंबर 2011

कविता : पृथ्वी

 पृथ्वी

पृथ्वी पर है कितना भार,
इस पर चलती मोटर-कार....
पानी भरा है इसमें प्यारा,
पहाड़-झरनों से निकला सारा....
जब तेजाबी वर्षा होती ,
पृथ्वी पर विनाश की क्रिया होती है.....
पृथ्वी पर कितना भार,
इस पर चलती मोटर-कार.....

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर  

सोमवार, 13 जून 2011

कविता : भुखमरी

 भुखमरी 

जब पड़ता है आकाल जहां पर ,
आ जाती है भुखमरी वहां पर ....
भुखमरी का अर्थ है ' भूख से मरना ,'
इसलिए कहते हैं खाना कभी न बर्बाद करना ....
भुखमरी से लोग तड़प-तड़प कर मरते ,
उस समय सारे दुख दर्द हैं सहते  ....
जब पड़ता है आकाल जहां पर ,
आ जाती है भुखमरी वहां पर......

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर 

रविवार, 5 जून 2011

कविता : बच्चे चार

 बच्चे चार 

एक चिड़िया के बच्चे चार ,
कर रहे थे उड़ने का विचार ....
नहीं पेट में था उनके दाना ,
इसलिए असम्भव था उनसे उड़ पाना ....
तभी अचानक उनकी मम्मी आयी ,
साथ में अपने दाना लायी ....
एक चिड़िया के बच्चे चार ,
कर रहे थे उड़ने का विचार .... 

लेखक :ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर