शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

शीर्षक - पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से

कविता - पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से 
 पक्षी उड़े हैं जोर - जोर से ,
हवा चली हैं शोर -शोर से .....
 गगन में  सब नाचे गए ,
 सुबह -सुबह जैसे खेत लहाराये.....
 पेड़ो की डाले यूँ बहके ,
 बागो के सरे फ़ूल महके......
 शुध्द हवा दे रही ताजगी ,
 अब न रहेगी गन्दगी......
 यहाँ का मौसम सब को भाता,
बिन मांगे  बारिस करता ........
यहाँ का जाड़ा सबको भाता ,
 बिन बुलाये सर्दी लाता ......
 गर्मी भी सबको भाये ,
 यहाँ का मौसम गर्नी में ठंडी हवा बहाये......
 पक्षी उड़े हैं जोर -जोर से ,
 हवा चली हैं शोर- शोर से ........
 लेखक -आशीष कुमार 
 कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

सुन्दर कविता... बधाई!!!