बुधवार, 16 नवंबर 2011

कविता : आराम ही आराम

 आराम ही आराम 
एक सुबह कि आये शाम ,
जिसमें हो सिर्फ आराम ही आराम....
न करना पड़े कोई भी काम,
और हमें न करें कोई बदनाम....
न कोई डांटे न कोई चिल्लाये,
न कोई मुझसे काम करवाये...
हर दिन हो जाये येसा ही,
जिसमें केवल हो मजा ही....

लेखक : आशीष कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

काश! कि ये सच हो जाये,
ऐसा कोई दिन मिल जाये|
:-)